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अवैध शराब का कारोबार, ठेके भी मददगार!

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उरई। आटा के ददरी गांव में अवैध शराब का कारोबार सामने आने के बाद कई विक्रेताओं के नाम सामने आ रहे हैं पर इन्हें शराब कहां से मिलती है, इसका पता न तो आबकारी विभाग ही लगा रहा है और न पुलिस। सिर्फ पकड़े गए लोगों पर मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि जहां से अवैध विक्रेता पकड़े जा रहे हैं, उन इलाकों के ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश अवैध शराब विक्रेताओं को मिलावट के लिए शराब नजदीक के सरकारी ठेके से ही उपलब्ध होती है।
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बता दें कि ददरी गांव में दो लोगों की मौत के बाद से पुलिस और आबकारी विभाग ने अवैध शराब विक्रेताओं के खिलाफ अभियान चला रखा है। इस दौरान कच्ची शराब के अलावा देसी शराब भी बरामद हो रही है, लेकिन बीते तीन चार दिनों से पुलिस और आबकारी अवैध शराब विक्रेताओं को मिल कहां से रही है, इसका पता नहीं लगा पा रही। इस संदर्भ में ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश अवैध देसी शराब विक्रेता नजदीक के सरकारी ठेकों से ही शराब खरीदकर उन गांवों में सप्लाई करते हैं, जहां पर ठेके नहीं है।
पुलिस के हत्थे चढ़े कुछ शराब विक्रेताओं ने भी बताया कि वे इधर-उधर से क्वार्टर का इंतजाम कर उसमें पानी और केमिकल की मिलावट करते हैं। दो क्वार्टर को एक बर्तन में मिलाकर उससे फिर तीन क्वार्टर शराब तैयार की जाती है। इस हिसाब से रोजाना 700 से 1000 रुपये की कमाई हो जाती है।
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आटा के ददरी, अकोढ़ी, रिरुआ, चमारी, उकासा आदि ऐसे गांव हैं, जहां पर शराब के ठेके तो नहीं है लेकिन शराब की कोई कमी भी नहीं है, अधिकांश अवैध विक्रेता ठेके से ही शराब खरीदते हैं। सहालगों के वक्त बिना ठेके वालों गांवों में अवैध शराब की बिक्री बढ़ जाती है।
जिला आबकारी अधिकारी केपी यादव बोले, वैसे तो नियम है कि ठेके से किसी को भी एक पेटी शराब की न दी जाए, फिर भी यदि ठेके मददगार बन रहे हैं तो इसके लिए विभाग जल्द ही स्टाक चेकिंग का भी अभियान चलाएगा। किसी भी कीमत पर ठेके से अवैध शराब की बिक्री न होने दी जाएगी। कहीं से शिकायत मिली तो उस पर तत्काल कार्रवाई भी होगी।
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