कालपी। कालपी का ऐतिहासिक हाथ कागज उद्योग कभी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखता था। अब दोबारा उसी पहचान को हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। गुरुवार को तहसील सभागार में आईआईटी कानपुर और हाथ कागज निर्माताओं के बीच एक समन्वय बैठक हुई। जिसमें इस उद्योग को पुनर्जीवित करने के उपायों पर चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि कालपी का हाथ कागज उद्योग नगर की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का प्रतीक रहा है। यह उद्योग एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल है और शासन द्वारा वित्त पोषित भी किया गया है। इसके बावजूद यह उद्योग अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। इसलिए आईआईटी कानपुर को इसके तकनीकी और व्यावसायिक सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आईआईटी कानपुर की परियोजना अधिकारी रीता सिंह ने कहा कि समय के साथ उद्योगों में बदलाव जरूरी होता है। डिजाइन और नवाचार इस उद्योग की रीढ़ हैं और इसके लिए आईआईटी उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण देने जा रहा है। बैठक में आईआईटी की प्रोफेसर व समन्वयक डॉ. मोनिका ठाकुर ने कहा कि बाजार में टिके रहने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, प्रयोगधर्मिता और आकर्षक डिजाइन अनिवार्य हैं।
उन्होंने कहा कि देश में कई अन्य कागज इकाइयों ने समय के साथ तकनीक और डिजाइन में बदलाव कर सफलता पाई है, कालपी भी वैसा ही कर सकता है। इस दौरान एसडीएम सुशील कुमार सिंह, जिला उद्योग केंद्र के प्रभारी प्रभात यादव, तहसीलदार अभिनव तिवारी, प्रमुख उद्यमी रविंद्र नाथ गुप्ता, विनीत गुप्ता, राजू पतारा, अभिषेक गुप्ता, उदय प्रताप सिंह, पंकज पांडेय, इशहाक अहमद, अरविंद गुप्ता, विदित शुक्ला, सलीम खान आदि मौजूद रहे।
उद्यमियों की समस्याएं और सुझाव-
सेवन सीज हैंडमेड पेपर के संचालक कुलदीप शुक्ला ने कहा कि लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है जबकि उत्पादन और बिक्री मूल्य में गिरावट आ रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल हो गया है।
युवा उद्यमी दिनकर पुरवार ने कहा कि जब तक इस उद्योग में कुछ नया नहीं जोड़ा जाएगा, यह फिर से नहीं खड़ा हो पाएगा।
हाथ कागज निर्माता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार तिवारी ने जीएसटी और विद्युत दरों में रियायत की मांग करते हुए कहा कि इससे उद्योग को नई ऊर्जा मिल सकती है।