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शब्द साहित्य का उपहार लेके आई हूं...

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कवि सम्मेलन में कवियों को सम्मानित करते अमित द्विवेदी। - फोटो : ORAI
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शब्द साहित्य का उपहार लेके आई हूं...
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उरई। अकबरपुर इटौरा में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं से जमकर वाहवाही लूटी। आगरा से आई कवयित्री ममता वाणी ने ‘विनय विवेचना विचार लेके आई हूं, शब्द साहित्य का उपहार लेके आई हूं’ सुनाया तो लोग वाह-वाह कर उठे।
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सरस्वती वंदना गरिमा पाठक ने सुनाई ‘हर गली अब तुम्हारे गीत गा रही है, वीणा बजाकर शारदे उसको बुला रही है’। अचंल शर्मा ने पढ़ा कि ‘नैना हमारे प्यासे है, ये कैसे चौमासे है’। मंसूर अली हसरत ने ‘कोई हाथों में गीता कोई कुरान रखते हैं, जिन्हें दिल में खुदा है, वो दिल में ईमान रखते हैं’। राघवेंद्र सिंह सेंगर ने ‘जो मिले नहीं कभी वो दिखे फेसबुक पर, हम फिदा हो गए उनके हर एक रुख पर’। कवयित्री नीलम कश्यप ने पढ़ा ‘राम तुम्हारी सीता बनवासी हो गई, अग्नि परीक्षा देकर भी बनवासी हो गई’ तो कवि रवींद्र शर्मा ने ‘सुबह लिखें हैं शाम लिखें हैं, प्यार भरे पैगाम लिखे हैं’। अंतस की कुंजों में हमने राधा के घनश्याम लिखे हैं। ‘घूंघट पायल बिंदिया लिखकर मन में शालिग्राम लिखे हैं’। खलीक, वीरेंद्र तिवारी ने भी कविता सुनाकर वाहवाही लूटी। सम्मेलन की अध्यक्षता वीरेंद्र परमार वीर ने की। संचालन करीम खां करीम ने किया। इस दौरान पंचायत सशक्तिकरण अभियान की प्रदेश महासचिव सारिका तिवारी आंनद, सुल्तान मेहंदी, प्रधान संघ के झांसी मंडल अध्यक्ष अमित द्विवेदी इतिहास ने कवियों और अतिथियों को सम्मानित किया।
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