इस बार मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग की ओर से हर परिवार को मतदान संबंधी सभी सूचनाएं एक पुस्तिका के रूप में उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें मतदान केंद्र से लेकर वोट देने के पूर्व की सभी सावधानियां व सूचनाएं शामिल होंगी। अब तक मतदान के पूर्व वोटर को केवल एक पर्ची या मतदान स्लिप दे दी जाती थी। इसमें उसके अपने ब्योरे व
मतदान केंद्र व बूथ नंबर का विवरण ही होता था। विधानसभा चुनाव 2017 में वोटरों की सुविधा का चुनाव आयोग की ओर से खासा ध्यान रखा जा रहा है। इसी क्रम में इस बार हर मतदाता को फोटो वाली चुनाव पर्ची देने के साथ ही उसके परिवार से संबंधित विभिन्न सूचनाएं एक पुस्तिका में उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पुस्तिका में मतदान की तारीख, वोटर के
बूथ नंबर व उसके पते आदि की जानकारी होगी। किन बातों का ध्यान रखना है, क्या करना है, क्या नहीं करना है, यह भी इस पुस्तिका में अंकित होगा। इसमें बूथ लेवल अधिकारी,
उसका संपर्क नंबर व विभिन्न वेबसाइटों के साथ हेल्पलाइन आदि की जानकारी भी अंकित होगी। इस संबंध में नोडल अधिकारी आलोक यादव ने बताया कि चुनाव आयोग ने आचार संहिता जारी करने के साथ ही इन नियमों को भी जारी किया है। इस संबंध में तैयारियां की जा रही हैं।
प्रत्येक विस क्षेत्र मेें एक महिला मतदान केंद्र
आयोग ने इस बार के विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए तमाम कदम उठाए हैं। इस क्रम में जिन इलाकों में महिलाओं को पुरुषों के साथ खड़े रहने में कठिनाई महसूस होती है, वहां अलग से महिला मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। हालांकि इसके लिए जिला स्तर पर अब तक कोई सर्वे नहीं किया गया है जिससे पता लगे कि किन क्षेत्रों में ऐसी स्थिति
होगी और एक विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं के लिए अलग से कितने मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। वहीं, आयोग के निर्देश के अनुसार हर विधानसभा क्षेत्र में अनिवार्य रूप से एक ऐसा मतदान केंद्र होगा जो पूरी तरह महिला कर्मचारियों के प्रबंधन मेें होगा। महिला कर्मचारियों की देखरेख में ही यहां मतदान कराया जाएगा। नोडल अधिकारी आलोक यादव ने इसकी पुष्टि की।
सरकारी बिल नहीं भरा तो नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
चुनाव में विधायकों और प्रत्याशियों के लिए सरकारी बिजली का बिल जमा न करना भारी पड़ सकता है। आयोग के निर्देशानुसार अब सभी प्रत्याशियों को मकान, बिजली व टेलीफोन जैसी सरकारी सुविधाओं का बिल चुकता करना अनिवार्य होगा। नामांकन के वक्त उसे इस संबंध में अलग से नो डिमांड सर्टिफिकेट देना होगा। इसमें गलत जानकारी देने पर प्रत्याशी की
उम्मीदवारी रद कर दी जाएगी। यह सख्त निर्देश आचार संहिता लागू करने के साथ ही जारी किया गया है। जिला नोडल अधिकारी आलोक यादव के अनुसार बड़ी संख्या में राजनीतिक व्यक्तियों के इन सेवाओं का बिल न चुकाने की शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने यह फैसला किया है।