होलिका दहन स्थलों का निरीक्षण करते एसडीएम व सीओ
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जालौन। होली जलाने के लिए नगर में पूर्व निर्धारित 22 स्थानों लगे होलिका दहन स्थलों का एसडीएम, सीओ व कोतवाल ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से शांतिपूर्वक तरीके से होली का त्योहार मनाने की अपील की।
बुंदेलखंड में परंपरागत तरीके से मनाए जाने वाले होली के पर्व को लेकर होलिकाष्टक पर नगर के 25 वार्डों के 22 स्थानों एवं ग्रामीण क्षेत्र में 82 स्थलों पर होली की डांढे की स्थापना की जाती है। होलिका दहन स्थलों पर हल्दी, चावल, एवं विधि विधान से पूजा अर्चना कर होली का डांढा (लकडियां) स्थापित की जाती हैं। है। होली के डांढा की स्थापना होते ही होलिका दहन के लिए लकडिय़ों की व्यवस्था के लिए हुरियारों की टीमें लकड़ियां इकट्ठी करने में जुट जाती हैं। नगर में सबसे बड़ा होलिका दहन द्वारिकाधीश मंदिर परिसर पर होता है।
इसके अलावा मोहल्ला तोपखाना, नारोभास्कर, जोशियाना, खंडेराव, रावतान, गणेश जी में भी होलिका दहन होता है। महिलाओं ने होलिका दहन की अग्नि से घरों में जलाए जाने वाले गाय के गोबर के छोटे-छोटे उपलों (जिन्हें बुलबुलियां भी कहा जाता है) को भी लगभग एक सप्ताह पूर्व से बनाना शुरू कर दिया है। पर्व पर लोगों को चखाने के लिए स्वादिष्ट पकवान भी तैयार किए जा रहे हैं। होली के डांढों पर कहीं कोई विवाद न हो इसके लिए एसडीएम सुनील कुमार शुक्ला, सीओ सुबोध गौतम, कोतवाल सुनील सिंह ने होली दहन के स्थलों का निरीक्षण लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि बिजली के आसपास के तारों को देखते हुए सावधानी के साथ होलिका दहन करें। होली जलाने के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को क्षति न पहुंचाएं।