उरई। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में हेपेटाइटिस जांच की सुविधा शुरू हो गई है। जिला अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. एसडी चौधरी को इसका नोडल बनाया गया है। फिलहाल 110 मरीजों का इलाज चल रहा है।
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की प्रारंभिक जांच और दवा वितरण शुरू हो गया है। हेपेटाइटिस की वायरल लोड की जांच के लिए सैंपल राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई या कानपुर भेजे जाते हैं। वहां से करीब 20 दिन बाद रिपोर्ट आती है। वायरल लोड के अनुसार दवा शुरू की जाती है। डॉ. एसडी चौधरी का कहना है कि यदि परिवार के कोई सदस्य हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है तो उसे बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। संक्रमित व्यक्ति का सामान इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसके कपड़े, ट्रूथब्रुश, बर्तन अलग कर देना चाहिए।
इस बीमार का इलाज बीमारी के वायरल लोड के अनुरूप दिया जाता है। मरीज को कितनी दवा देनी है, वह रिपोर्ट के अनुसार दी जाती है। हेपेटाइटिस सी लिवर से संबंधित वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लिवर को गंभीर नुकसान हो जाता है। खास बात यह है कि संक्रमित लोगों को यह पता नहीं चलता है कि उन्हें यह बीमारी है। क्योंकि इसके लक्षण आने पर कई साल लग जाते है। इसलिए समय समय पर इसकी जांच कराते रहना चाहिए।