उरई। फसल की रखवाली करें या फिर खाद के लिए लाइन लगाएं...। अगर पांच-छह दिन में खाद नहीं मिली तो धान की फसल खराब होने की आशंका है। इससे पैदावार का घटना तय है। यह व्यथा है कि जिले के किसानों की जो खाद संकट से जूझ रहे हैं।
वहीं, सचिवों का कहना है कि ऑर्डर भेजने के बाद भी खाद की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं, प्रशासन के अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जिले में खाद की कमी है। हकीकत यह है कि किसान 15–20 दिन से खाद के लिए भटक रहे हैं। सुबह से शाम तक लंबी लाइन में लगने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पहाड़गांव, माधौगढ़, सिरसाकलार सहित कई क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब है। किसानों का सवाल है कि जब हर साल इसी समय खाद की सबसे ज्यादा मांग होती है तो प्रशासन पहले से पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं करता। यह लापरवाही किसानों को भारी नुकसान की तरफ धकेल रही है।
16 दिन से लगातार परेशान किसान
पहाड़गांव। किशुनपुरा साधन सहकारी समिति, पहाड़गांव में डीएपी और यूरिया खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। किसान संस्था के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं और शासन व प्रशासन को कोस रहे हैं।
जानकारी के अनुसार समिति में अब तक केवल 800 बोरी डीएपी और 450 बोरी यूरिया की सप्लाई हुई थी, जो वितरण के बाद खत्म हो चुकी है। 21 अगस्त को डीएपी और 23 अगस्त को यूरिया का स्टॉक समाप्त हो गया था। तब से अब तक संस्था पर खाद नहीं पहुंची।
किसानों का कहना है कि वे रोज लाइन लगाते हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है। संस्था के कुल 172 खाताधारक किसान हैं, जो समय पर लेन-देन और ऋण चुकता करते हैं। इसके बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल रही। किसान ओमप्रकाश शर्मा, बृजेन्द्र कुमार, राजेश कुमार, सुरेश सीरैठिया, अनिल कुमार, परशुराम सहित कई लोगों ने बताया कि हर साल वे संस्था का ऋण समय से चुकता करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सुविधा नहीं मिलती।
संस्था के सचिव सुभाष प्रजापति ने कहा कि खाद की मांग ऊपर भेजी गई है। जैसे ही आपूर्ति होगी, किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल मेरे पास केवल खराब डीएपी और यूरिया 20–22 बोरियां बची हैं।
रबी की बुआई से पहले संकट गहराया
माधौगढ़। ब्लॉक क्षेत्र की 12 सहकारी समितियों में इन दिनों डीएपी खाद का टोटा है। रबी की बुआई का समय नजदीक आने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर डीएपी नहीं मिली तो बुआई प्रभावित होगी।
मौजूदा समय में पूरे ब्लॉक क्षेत्र की समितियों में सिर्फ 185 बोरी डीएपी और 2650 बोरी यूरिया है। शैलेंद्र सिंह, शत्रुघ्न सिंह, प्रबल प्रताप सिंह, शेर सिंह आदि ने बताया कि क्षेत्र के एक सौ से अधिक गांवों में धान की खेती की जा रही है। धान की फसल और रबी की बुवाई दोनों के लिए डीएपी व यूरिया की आवश्यकता है, लेकिन शुरू से ही खाद की किल्लत बनी हुई है। किस समितियों में कितना स्टॉक बी पैक्स अटा गांव में कोई खाद उपलब्ध नहीं।
सचिव प्रेमचंद शर्मा का कहना है कि सोमवार को डिमांड भेज दी गई है। बी पैक्स हरौली में 50 बोरी डीएपी, 200 बोरी यूरिया। बी पैक्स रुदपुरा में 100 बोरी डीएपी, 450 बोरी यूरिया। बी पैक्स गोहन में 43 बोरी डीएपी, 100 बोरी यूरिया। बी पैक्स धमना में 15 बोरी डीएपी, 450 बोरी यूरिया। बी पैक्स पड़कुला में डीएपी नहीं, 110 बोरी यूरिया। बी पैक्स मिझौना में डीएपी नहीं, 450 बोरी यूरिया।बी पैक्स गोपालपुरा में 45 बोरी डीएपी, 450 बोरी यूरिया। बी पैक्स अमखेड़ा में 40 बोरी डीएपी, 450 बोरी यूरिया।
सहकारी संघ सरावन – 22 बोरी डीएपी, 270 बोरी यूरिया। क्रय-विक्रय सहकारी समिति माधौगढ़ में तीन बोरी डीएपी, 10 बोरी यूरिया। किसानों राम प्रताप सिंह, राघवेंद्र सिंह और अजीत सिंह का कहना है कि डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन समितियों पर यह उपलब्ध ही नहीं है। एडीसीओ सुरेश चंद्र वर्मा ने दावा किया कि खाद की कोई कमी नहीं है। बहुत जल्द समितियों में नई खेप भेज दी जाएगी। (संवाद)
सिरसा कलार और जखा में भी खाद नहीं
सिरसा कलार। साधन सहकारी बैंक सिरसा कलार और जखा पर भी खाद का स्टॉक खत्म हो गया है। यहां सोमवार को ही खाद समाप्त हो गई थी। दोनों जगह करीब 500 किसान लगातार चक्कर काट रहे हैं। सचिव आजाद सिंह ने बताया कि बुधवार तक खाद आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल स्टॉक नहीं है। (संवाद)