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महाहड़ताल: दफ्तरों में लटके ताले, गरजे कर्मचारी

Wed, 10 Aug 2016 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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कलेक्ट्रेट में धरना सभा को संबोधित करते राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अध्यक्ष रामप्रसाद श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वावधान में राज्य कर्मचारियों के 27 संगठन एकजुट होकर तीन दिवसीय महाहड़ताल में शामिल हुए। बुधवार को पहले दिन दफ्तरों में ताला बंद कर कर्मचारियों ने मांगे पूरी न करने पर सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। कहा गया कि सरकार की वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कर्मचारी समय से दफ्तर तो आता है लेकिन
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उसके जाने का समय नहीं होता। सरकार की योजना के क्रियान्वयन के लिए देर शाम तक दफ्तरों में पसीना बहाता है। इसके बावजूद सरकार का अड़ियल रुख अपनाए है। कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। बुधवार कोे विकास भवन परिसर में महाहड़ताल कर धरना सभा में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष राम प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि

लंबित मांगें निस्तारित न होने से कर्मचारियों में राज्य सरकार के प्रति आक्रोश है। जिन मांगों पर सहमति दे दी उसके लिए भी शासनादेश जारी नहीं किया गया। सरकार वादाखिलाफी कर रही है इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू किए जाने की मांग लगातार की जा रही है। संविदा कर्मचारियों को
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राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग भी लंबित है। जिला मंत्री हरीश राठौर ने कहा कि राजकीय क्षेत्र में काम करने वाले रोजगार सेवक, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका, पीआरडी, होमगार्डस, रसोइया, कंप्यूटर आपरेटर समेत अन्य कर्मी जो संविदा पर काम कर रहे है उनका मानदेय 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। अंगद सिंह कछवाह ने कहा कि राज्य

कर्मियों को 300 दिन के अर्जित अवकाश के स्थान पर 600 दिन का उपार्जित अवकाश की सुविधा देकर नकदी करण की सुविधा दी जाए। मानसिंह यादव ने कहा कि 8,16,20 वर्षों की कुल सेवा के आधार पर तीन पदोन्नति पद का ग्रेड वेतन दिया जाए। ग्राम विकास अधिकारी संघ के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों का शोषण

किया जा रहा है जिस पर तत्काल प्रभाव से लगाम लगनी चाहिए। उन्होंने जालौन ब्लाक का जिक्र भी किया। जिला कोआर्डिनेटर कुलदीप थापक ने आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने की जरूरत बताई। इसके अलावा रेखा जाटव, प्रवेश यादव, कपिल ओझा, संदीप श्रीवास्तव, रामसिंह प्रजापति, उद्यम बाबू यादव,  पुष्पेंद्र त्रिपाठी, शील कुमार दूरबार,

अब्दुल हमीद, रमेश फौजी समेत अन्य कर्मचारियों ने भी संबोधित किया। इसी के साथ कर्मचारियों से कहा गया कि हक के लिए हर संघर्ष को तैयार रहें। अब सरकार से अपना हक लेने का समय आ गया है। इस मौके पर अंजनी श्रीवास्तव, रोहित खरे,  भगवती शरण तिवारी, निर्भय यादव, टीआर नामदेव, पवन तिवारी, राजेंद्र सिंह, उमेश मिश्रा, किरन

निरंजन, जुलेखा, राजीव गोयल, ममता, प्रवीण रत्नम, गौरव, रामवरन समेत बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी मौजूद रहे। सभा की अध्यक्षता हरीराम ओमरे ने की और संचालन हरीश राठौर ने किया।
 दफ्तरों में तालाबंदी, परेशान हुए फरियादी
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वावधान में 27 संगठनों ने विकास भवन में महाहड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया। विकास भवन में ताला बंदी कर दी जिसकी वजह से कोई अधिकारी भी दफ्तर में नहीं पहुंच सका। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले फरियादियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुठौंद गांव निवासी मुनेश समाज कल्याण विभाग में

समाजवादी पेंशन योजना में अपनी पत्नी का बैंक खाता सही कराने के लिए आया था, लेकिन तालाबंदी होने से उसे निराश होना पड़ा। मुनेश ने कहा कि प्रदर्शन का यह तरीका तो ठीक नहीं है। लोगों की बात सुनने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। पिरौना गांव निवासी शिवदयाल सोशल आडिट में साक्षात्कार देने के लिए आया था लेकिन हड़ताल के चक्कर में कुछ नहीं हुआ। 
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