अगर आप गांव क्षेत्र में रहते है और हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता को लेकर
चिंतित रहते हैं तो निश्चिंत हो सकते हैं। केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण
पेयजल कार्यक्रम के रूप में एक खुशखबरी लेकर आई है। सरकार ने गांव में लगे
हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता परखने का जिम्मा लेकर काम शुरू कर दिया है।
गांव में हैंडपंप जिस क्षेत्र में लगा है उसकी मैपिंग भी कराई जा रही है।
इससे
उसे वेबसाइट पर अपलोड किया जा सके। इसकी शुरुआत डकोर ब्लाक क्षेत्र से
की गई है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम तहत
जनपद के सभी नौ विकास खंड क्षेत्र के 575 ग्राम पंचायतों में स्थापित
इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता परखने के लिए काम शुरू कर दिया
गया है। इसके लिए सरकार ने एडीसीसी लिमटेड कंपनी को अनुबंधित कर लगाया
है।
कंपनी के एक्सपर्ट गांव में हैंडपंप के पानी का नमूना लेकर उसका परीक्षण
करेंगे और फिर इसकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे। पानी में किस तत्व की कमी
है, वह दूषित तो नहीं है, इसके पीने से लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव तो
नहीं पड़ेगा, इन बिंदुओं पर जांच की जाएगी। इसके अलावा स्थापित हैंडपंपों
की मैपिंग कराई जाएगी। इंडिया मार्का हैंडपंप कहां लगा है और उसकी
स्थिति
कैसी है इसकी भी एक रिपोर्ट तैयार होगी। हैंडपंप पर काम करने वाली टीम न
मिटने वाले मार्का से नंबर डालेगी। इससे उस हैंडपंप की गिनती दो बार न हो
सके। सबसे पहले डकोर ब्लाक क्षेत्र में काम शुरू किया गया है। यहां के 54
गांव में लगे हैंडपंपों पर काम किया जा रहा है। इसके बाद कदौरा और अन्य
ब्लाकों में काम पर जोर रहेगा।
वर्जन
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल
कार्यक्रम के तहत हैंडपंप की मैपिंग और उसके पानी के परीक्षण पर काम शुरू
हो गया है। हर ब्लाक में कंपनी की टीम पहुंचकर काम करेगी। इसके लिए
कार्यक्रम तय किया गया है।-आरएस गौतम, जिला विकास अधिकारी जालौन