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सरकारी जमीनों पर आलीशान मकान नजरंदाज

Sat, 13 Feb 2016 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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कमजोरों पर कहर और पहुंच वालों पर मेहर, प्रशासन कुछ इसी अंदाज में काम करता दिख रहा है। गुजरे तीन चार दिन से चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान में लहारियापुरवा में नजूल की जमीन पर बने तमाम गरीबों के कच्चे और पक्के मकान बेरहमी से ढहाए गए। इस दौरान गरीबों ने मोहलत मांगी, कागज दिखाए लेकिन अफसर नहीं पसीजे। उधर, ग्रीनलैंड लेकर
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नगर पालिका की नजूल भूमि पर आलीशान इमारतें खड़ी हैं लेकिन ये अफसरों को दिखाई ही नहीं पड़ रहीं। यहां तक कि पशु बाजार की जगह में भी लोगों ने मकान बना लिए। शहर के बीच से निकले नाले के किनारे की जमीन पर कब्जा हो गया और प्रशासन ताकता रहा। डेढ़ दशक में तीन बार बाढ़ आई। तब भी अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने में गंभीरता नहीं

दिखाई। इससे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। बता दें कि नगर में इन दिनों नजूल की भूमि को लेकर प्रशासन के तेवर अचानक सख्त हो गए हैं। लहारिया पुरवा में तकरीबन 150 कच्चे-पक्के मकानों को प्रशासन ने सख्ती के साथ ध्वस्त किया है। इस कार्रवाई और इसके तरीके को लेकर प्रशासन सवालों के घेरे में है। शहर में शांति नगर से लेकर रामनगर,
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पाठकपुरा, उमरारखेरा का एक हिस्सा, हजारीपुरा, जेलरोड से लेकर बाईपास के आगे तक नाला किनारे जो ग्रीनलैंड की जमीन खाली पड़ी थी  उसमें आलीशान इमारतें खड़ी हैं। इन पर आज तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसको लेकर शहर में चर्चा का बाजार गर्म है। बीएसए दफ्तर के सामने भी अतिक्रमण है। इतना ही नहीं शहर के बीच नाले और ग्रीनलैंड

पर लोगों ने व्यापारिक प्रतिष्ठान बना रखे हैं। कुछ महीने पूर्व प्रशासन से शिकायत भी हुई और पैमाइश के आदेश भी दिए गए। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में है। वर्ष 2013 में जब बाढ़ आई तो फिर नाले को कब्जा मुक्त करने की रणनीति

बनी लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। स्पष्ट है ग्रीनलैंड पर हुए कब्जे को लेकर प्रशासन की उदासीन है। इससे जहां पार्क बनना चाहिए वहां रिहायशी मकान तैयार हो रहे हैं। इस सबके बाद भी इन पर प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। यहां अभियान चलाने के बारे में सोचा तक नहीं जा रहा है।

जलनिकासी होती है प्रभावित
शहर के प्रमुख नालों पर अतिक्रमण से जल निकासी प्रभावित हो रही है। जब दूसरे क्षेत्र से पानी आता है तो वह इलाके में भर जाता है। बाढ़ के हालात बन जाते हैं। वर्ष 2003 में जब बाढ़ के हालात बने थे तो दो लोगों की जान तक चली गई थी। वर्ष 2013 में भी बाढ़ खूनी साबित हुई। कई गृहस्थियां उजड़ गई लेकिन जल निकासी के प्रबंध नहीं हो सका।

पशु बाजार की जमीन पर भी मकान
शहर में नगर पालिका की जमीन पर भी लोगों ने कब्जा कर लिया। बच्चा जेल के पीछे 6.15 एकड़ जमीन पशु बाजार के लिए छोड़ी गई थी। इस पर मौजूदा समय में तकरीवन 17 पक्के मकान बने हुए है। नगर पालिका ने इन मकानों को चिह्नित

कर लिया और नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली। यही वजह है कि अन्य स्थानों पर खाली जमीन पर भू माफियाओं ने कब्जा करा दिया। पहले कच्चे और फिर पक्के मकान तैयार हो गए। खास बात तो यह है कि नजूल की जमीन पर बिजली, पानी से लेकर पक्की सड़क की सुविधा भी मिल गई।

नगर पालिका की जमीन पर जो कब्जे हैं, उन्हें हर हाल में हटाया जाएगा। इसकी शुरुआत लहारिया पुरवा से की गई है। इसके अलावा बच्चा जेल के पीछे भी कुछ मकानों को चिह्नित करके उन्हें नोटिस दिया जा चुका है। अतिक्रमण के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। अतिक्रमण हटाया भी जाता है। आगे भी प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर बिना भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी। -रवींद्र कुमार वर्मा, ईओ, नगर पालिका उरई
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