कालपी (जालौन)। चर्चित छौंक के फर्जी बैनामा कांड में एसआईटी ने सोमवार को फर्जी विद्यावती बनकर बैनामा करने वाली वृद्धा, उसके नाती सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। नाती ने ही लालच में आकर उन्नाव निवासी वृद्धा को बैनामा कराने के लिए तैयार किया था। दरअसल, इसी मामले में फर्जी आधार कार्ड कांड में फंसे फ्रेंचाइजी संचालक को पहले ही पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
कालपी कोतवाली क्षेत्र के छौंक गांव निवासी विद्यावती की हाईवे स्थित करोड़ों की जमीन का फर्जी बैनामा 2023 में जालसाजों ने करा दिया था। खुलासे के बाद क्रेता कोमल सिंह यादव की तहरीर पर धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। उस समय मामले की जांच कोतवाली के अतिरिक्त निरीक्षक रहे मुहम्मद अशरफ कर रहे थे।
फिर मामले की जांच एसआईटी से कराई गई। टीम का प्रभारी परमहंस तिवारी को बनाया गया था। इस मामले में लगभग 26 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किए गए थे। वहीं, एक माह पहले आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी की फ्रेंचाइजी के संचालक जालौन निवासी धर्मेंद्र सक्सेना को अंडमान-निकोबार पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद फर्जी आधार बनाकर बैनामा करने की कड़ी भी जुड़ गई। फिलहाल धर्मेंद्र जेल में बंद है।
एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार को परमहंस तिवारी और अतिरिक्त प्रभारी मोहम्मद अशरफ की गतिविधि भी संदिग्ध मिली थी। इस पर उन्होंने दोनों को निलंबित कर दिया। इसके साथ तत्कालीन सीओ देवेंद्र पचौरी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। एसपी ने पूरे मामले की जांच दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए।
एसआईटी प्रभारी अजय पाठक के नेतृत्व में टीम ने दोबारा जांच शुरू की। टीम ने सोमवार को फर्जी विद्यावती बनीं उन्नाव जिले के असीवन थाना क्षेत्र के एनी खुर्द गांव निवासी रामदेई (78), उसके नाती रोहित चौरसिया, उदनपुरा कालपी निवासी दयाशंकर, बिहार के जिला गोपालगंज के थाना कुचाय कोर के भटवां गांव निवासी रामआसरे चौधरी को गिरफ्तार किया है। इसमें रामआसरे चौधरी का वर्तमान पता कानपुर गुनैजी है।
एसपी ने बताया कि 28 अगस्त 2023 को रामदेई ने नाती के साथ आकर रजिस्ट्रार कार्यालय में फर्जी आधार कार्ड प्रस्तुत कर कोमल सिंह व जितेंद्र सिंह के नाम पर रजिस्ट्री की थी। पुलिस ने सभी पर कार्रवाई की है।
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लालच में नाती ने दादी को भिजवाया जेल
पुलिस के अनुसार, फर्जी विद्यावती बनी रामदेई का नाती रोहित कानपुर निवासी राम आसरे चौधरी की दुकान में काम करता था। वहीं मास्टरमाइंड से उसकी पहचान हुई थी। उसने पैसे के लालच में अपनी दादी को कालपी बुलाया और फर्जी बैनामा में शामिल कर लिया। अब दोनों जेल पहुंच गए हैं।
मास्टरमाइंड पर कसा शिकंजा
एसआईटी की जांच में एक संदिग्ध की कॉल डिटेल ने पूरे खेल का पर्दाफाश किया है। टीम का दावा है कि अब इस मामले के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।