जालौन (उरई)। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम जगनेवा में शनिवार की रात मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया। यहां टिनशेड वाले कमरे से चार मजदूरों को बंधक बनाकर उनसे कथित रूप से मजदूरी कराई जा रही थी। पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाकर चारों मजदूरों को मुक्त कराया। इसमें एक मजदूर दिल्ली, एक बरेली और दो हमीरपुर के हैं। पुलिस ने मकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया हैं, जबकि उसका बेटा भाग निकला।
कोतवाली प्रभारी हरिशंकर चंद को सूचना मिली थी कि गांव के बड़े कास्तकारों में एक हरिहर प्रसाद दांतरे अपने यहां कुछ लोगों से बंधुआ मजदूरी करा रहा है। सूचना पर क्षेत्राधिकारी शैलेंद्र बाजपेई के नेतृत्व में कोतवाल हरिशंकर चंद, एसआई निसार अहमद और पुलिस बल रात करीब 11 बजे गांव पहुंचे।
पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो उसने मजदूरों के बंधक होने से इन्कार कर दिया। काफी देर तक तलाश के बाद जब पुलिस लौटने की तैयारी कर रही थी, तभी पास स्थित पशुबाड़े के टिनशेड वाले कच्चे कमरे से आवाज सुनाई दी। शक होने पर पुलिस वहां पहुंची तो कमरे के बाहर ताला लगा मिला। पुलिस ने आवाज दी तो अंदर से धीमी आवाजें सुनाई पड़ीं। ताला खुलवाकर दरवाजा खोला गया तो भीतर चार मजदूर बदहवास हालत में बंद मिले। उनके चेहरे पर डर और थकान साफ दिखाई दे रही थी। पुलिस को देखते ही मजदूर भावुक हो उठे और कुछ की आंखों से आंसू छलक पड़े।
मजदूरों ने अपने नाम दिल्ली विजय नगर निवासी अनिल, बरेली निवासी वीरेंद्र, हमीरपुर के कछुआ कला निवासी प्रेमचंद्र और राठ क्षेत्र के बेगए गांव निवासी धर्मेंद्र बताए। मौके से 11 पिट्ठू बैग भी बरामद किए गए। सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी भी गांव पहुंच गए। पुलिस ने मौके से आरोपी हरिहर प्रसाद दांतरे को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका बेटा अवधेश फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
सीओ शैलेंद्र बाजपेई ने बताया कि चारों मजदूरों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया है और उनके परिजनों को सूचना दे दी गई है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बासी रोटी व दाल खाकर गुजारा कर रहे थे मजदूर
घर में बंधक मजदूरों से उनकी क्षमता से अधिक काम लिया जा रहा था। काम न करने पर जानवरों की तरह मारा जाता था। मजदूरों ने बताया कि प्रतिदिन उन्हें घर में बचने वाली बासी रोटी व चार लोगों में करीब सौ ग्राम दाल दी जाती थी। इससे वह केवल अपना पेट भर सकें। कभी बासी रोटी के साथ उन्हें चटनी या भर्ता दे दिया जाता था।
दो साल से तीन लोगों को बनाया था बंधक, एक 17 दिन पहले आया
बंधक बनाए गए मजदूरों को जैसे ही पुलिस ने छुड़वाया तो उन्होंने अपने साथ हुई आपबीती पुलिस को बता दी। मजदूरों ने अपने नाम दिल्ली विजय नगर निवासी अनिल, बरेली निवासी वीरेंद्र, हमीरपुर के कछुआ कला निवासी प्रेमचंद्र बताए। उन्होंने बताया कि वह दो साल पहले इनकी चंगुल में फंस गए थे। इसके अलावा राठ क्षेत्र के बेगए गांव निवासी धर्मेंद्र ने बताया कि वह रास्ते में जा रहा था, तभी 17 दिन पहले उसे बाइक में बैठाकर अंदर कर लिया गया और भागने पर पिटाई की गई। इनसे वह यहीं मजदूरी करने लगा।
पिटाई कर कराई जाती थी मजदूरी
उरई। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि उनसे पिटाई कर मजदूरी कराई जाती थी। उन्हें भरपेट भोजन तक नहीं दिया जाता था और रात में कमरे में बंद कर दिया जाता था। लगातार शोषण और अमानवीय परिस्थितियों के कारण मजदूर मानसिक रूप से भी टूट चुके थे। शुरुआत में वे ठीक से अपनी बात तक नहीं कह पा रहे थे। पुलिस ने उन्हें पानी पिलाया और भरोसा दिलाया, तब उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई।
टिनशेड का कमरे बना कैदखाना, न पर्याप्त हवा की व्यवस्था
जिस कमरे में मजदूर बंद थे, वह टिनशेड से बना कच्चा कमरा है। कमरे में न हवा की समुचित व्यवस्था और न ही रहने लायक हालात हैं। भीषण गर्मी और घुटन के बीच मजदूर वहीं रहने को मजबूर थे।
एक गुमशुदगी से मिला सुराग
माधौगढ़ थाना क्षेत्र के सिरसा दोगढ़ी निवासी अनमोल गुप्ता दो मई से लापता है। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। तलाश के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि अनमोल जगनेवा में बंधुआ मजदूरी कर रहा है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। हालांकि सर्च ऑपरेशन के दौरान अनमोल मौके पर नहीं मिला।