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किस काम की दो महिला दरोगा और थाना

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शहर के झांसी रोड स्थित महिला थाना - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। मामला चाहे चोरी के आरोप का हो या फिर पुलिस प्रताड़ना का। पूरे प्रकरण में अधिकारियों की सूझबूझ ही सवालों के घेरे में हैं, जिसका जवाब भी देने से अब हर पुलिस अधिकारी कतरा रहा है।
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जिले में जब एक महिला थाना और दो-दो महिला दरोगा तैनात हैं, इसके बावजूद कोतवाली पुलिस को क्या जरूरत थी कि वह तीन युवतियों को कोतवाली में आठ-आठ घंटे तक बैठाकर उनसे पूछताछ करती। यदि अधिकारी थोड़ी सी सतर्कता बरतते तो युवतियों को कोतवाली लाने के बजाय कुछ ही दूरी पर स्थित महिला थाना भेजा जा सकता था। जहां महिला पुलिसकर्मियों की ओर से तीनों युवतियों से पूछताछ भी की जा सकती थी। इतना ही नहीं यदि पुलिस को शनिवार की सुबह भी नीशू से पूछताछ करनी थी तो वह महिला थाने में रात को ही उसे रोक भी सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस ने मामले को हल्के में लिया और पूरे दिन कोतवाली में ही बैठाकर पूछताछ की, फिर कागज पर सुबह फिर से बेटी को भेजने के लिए पिता से हस्ताक्षर कराकर घर भेज दिया। शहर के लोगों का कहना है कि महिला दरोगाओं को शोहदों के अभियान के लिए लगाया था, लेकिन उनका काम सिर्फ स्कूल कॉलेजों के कार्यक्रमों हिस्सा लेना भर रह गया है। हालांकि सीओ संतोष कुमार का कहना है कि पूछताछ के वक्त महिला दरोगा भी मौजूद थी पर परिजन इससे साफ इंकार कर रहे हैं।
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