मुहम्मदाबाद में पहली बार वोट डालने जाती हुई लड़कियां
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उरई। मौसम भले ही तेज गर्मी का था लेकिन जिले के ऐसे युवा मतदाता, जिनका वोट ही पहली बार बना था, उनका उत्साह भी देखते बन रहा था। नौ ब्लाकों में शायद ही ऐसा कोई बूथ रहा हो, जिसके सामने लगी वोटरों की लाइन में पहली मर्तबा वोट डालने आए युवा न रहे हो। कोई अपने परिजनों के साथ पहली बार वोट देने आया था तो कोई साथियों के साथ लेकिन उत्साह सभी में नजर आ रहा था। इन सभी युवा मतदाताओं का कहना है कि पहला मौका मिला है, कैसे जाने दें, अभी तो गांव की सरकार चुन रहे हैं, आगे प्रदेश और फिर देश की सरकार भी इसी उत्साह के साथ बनाएंगे। सुबह से लेकर देर शाम तक युवा मतदाता बूथों की लाइन में खड़े नजर आते रहे।
आटा निवासी युवती कलिंदरी का कहना है कि पहली बार उंगली में स्याही लगी बहुत अच्छा लग रहा है। गांव की सरकार बनाने का मौका मिला है। बेहद खुशी है।
26 अप्रैल का बेसब्री से इंतजार था ग्राम भिटारा की स्वीटी का कहना है कि वोटर बनने के बाद उन्हें 26 अप्रैल का बेसब्री से इंतजार था। पहली बार वोट देकर गर्व महसूस हो रहा है।
लौना गांव की रेशमा के मुताबिक युवा ही देश का भविष्य है, यह हम वोट की ताकत से साबित भी कर देंगे। उनके तमाम साथी भी वोट देने आ रहे हैं।
भीतर तक जाने का मौका मिला सहाव के दीपेंद्र तिवारी का कहना कि अभी तक बड़ों के साथ पोलिंग बूथ तक आकर खड़े हो जाते थे, आज पहली बार भीतर जाकर वोट डालने का भी मौका मिला है।
मुहम्दाबाद की रूबी ने बताया कि उसकी 26 अप्रैल की शाम को ही उसकी शादी भी है लेकिन उससे पहले वोट डालना बेहद जरूरी समझा, सो चली आई।
दो तीन साल बाद इच्छा पूरी हुई सहाव गांव के महावीर दीक्षित ने बताया कि जबसे वोट बना है, तब से इस पल का इंतजार था। दो तीन साल से बड़ी इच्छा थी वोट देने की, अब पूरी हुई है।
प्रतापपुरा बूथ से वोट डालकर निकलती संजू ने बताया कि वे वोट देने का पहला अनुभव बेहद सुखद रहा। इतना और कहना है कि जिसे भी चुना है वह विकास के काम करे बस। कदौरा ब्लाक के बागी गांव रवि कुमार ने बताया कि जब वोट नहीं था तो चुनाव में वे नेताओं के पीछे चलते थे, वोट बना तो उसे पाने के लिए नेता उसके पीछे घूमते रहे।