उरई। करीब साढ़े छह साल बाद छेड़छाड़ के एक मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय मिला।
मामले में दो सगे भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद आजाद की अदालत में गुरुवार को एक आरोप सिद्ध न होने पर एक को बरी किया गया, दूसरे को दोषी पाते हुए पांच साल की सजाई सुनाई गई। दोषी पर 11 हजार 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
शासकीय अधिवक्ता विश्वजीत गुर्जर ने बताया कि जालौन कोतवाली क्षेत्र के एक कस्बा निवासी पीड़ित पिता ने एक अगस्त 2017 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया कि 28 जुलाई 2017 को उसकी बेटी घर के पास बने शौचालय जा रही थी। आरोप था कि मोहल्ले के ही दो सगे भाई अंसार और असलम ने उसे पकड़ लिया, छेड़खानी व मारपीट की। मदद के लिए जब बेटी ने शोर मचाया तो उसकी मां मौके पर पहुंच गईं। आरोपियों ने उसकी मां को भी अपमानित कर पीटा। जान से मारने की धमकी दी और भाग गए। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिशें दीं, लेकिन वे नहीं पकड़े गए। बाद में दोनों आरोपियों ने खुद 17 अगस्त 2017 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय ने दोनों को जेल भेज दिया। विवेचना के बाद 22 सितंबर 2017 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह सुनने के बाद साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर असलम को दोषमुक्त किया और अंसार को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।