उरई। धोखाधड़ी कर सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल को जमीन बेचने वाले को कोर्ट ने पांच साल की कैद सुनाई है। उस पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस दोषी ने गुनाह कबूल लिया था। वहीं, बाकी बचे पांच आरोपियों का ट्रायल चल रहा है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रामनगर निवासी सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल बाबूलाल अहिरवार ने 11 अक्तूबर 2020 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि संतोष कुमार, राजू, नंदकिशोर नट, वीरदास, रामस्वरूप और रजिस्ट्री कार्यालय में बैठने वाले महेंद्र ने मिलकर साजिश रची। इन लोगों ने बताया कि नकटेला गांव में वीरदास के नाम खेत है और उसे पैसों की जरूरत है, इसलिए वह जमीन बेच रहा है।
आरोपियों ने साजिश के तहत करीब 12 लाख 10 हजार रुपये में जमीन का सौदा तय किया। बाबूलाल से पांच लाख 4 हजार रुपये नकद और 5 लाख रुपये चेक के माध्यम से ले लिए गए तथा एग्रीमेंट भी कर लिया गया। बाद में जांच में पता चला कि गांव में वीर दास नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है और कागजात फर्जी थे। इस तरह आरोपियों ने एग्रीमेंट के जरिए कुल 12 लाख 4 हजार रुपये की ठगी कर ली।
मामले में पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर 28 अप्रैल 2022 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। ट्रायल के दौरान वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे की अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी राजू ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उसे दोषी पाते हुए राजू को 5 साल के कारावास और 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। शेष बचे पांच आरोपियों के खिलाफ मामला विचाराधीन है।