उरई। डकोर गांव में करीब तीन साल पहले दवा दिलवाने के बहाने किसान का अपहरण कर हत्या किए जाने के मामले में कोर्ट ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास सुनाया है। साथ ही 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषियों का वृद्ध से रुपयों को लेकर विवाद था। रुपये न देने पड़े, इस पर उसकी सुपारी देकर हत्या करवाई थी।
डकोर गांव निवासी समरजीत ने 27 फरवरी 2023 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि 26 फरवरी को उसके पिता प्रेमबाबू घर से नहर पुल की ओर गए थे। उसने गांव के ही फूल सिंह, नेहरू, शत्रुघ्न उर्फ रामसहोधर और नेहरू के पुत्र कधई पर पिता का अपहरण करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस ने जालौन निवासी मोहित, अतर सिंह और आरिफ को गिरफ्तार कर पूछताछ की। उसकी निशानदेही पर छह मार्च 2023 को यमुना नदी के पार औरैया जनपद के जंगल में स्थित गंदे नाले से प्रेमबाबू का शव बरामद किया गया। समरजीत ने शव की पहचान अपने पिता के रूप में की। शव से उसका हाथ गायब था। उसके शरीर पर धारदार हथियार से वार किए गए थे।
पुलिस ने फूल सिंह, शत्रुघ्न उर्फ रामसहोधर, अतर सिंह, मोहित और आरिफ के खिलाफ धारा 147, 364, 302, 34 और 120बी आईपीसी के तहत आरोपपत्र 28 अप्रैल 2023 को न्यायालय में दाखिल किया। वहीं नेहरू व कंधई के खिलाफ कोई साक्ष्य न मिलने पर उनके नाम विवेचना से हटा दिए थे। पुलिस ने फूल सिंह, आरिफ और मोहित को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि शत्रुघ्न और अतर सिंह ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने पांचों आरोपियों को प्रेमबाबू के अपहरण और हत्या का दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने सभी को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।