उरई। जानलेवा हमले का आरोप साबित हो जाने पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश डकैती सुरेश चंद्र ने पिता-पुत्र को दस-दस साल की कैद और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला चार साल पुराना है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि 3 जुलाई 2015 की रात दस बजे एट थाना क्षेत्र के भरसूड़ा निवासी रामपाल घर के दरवाजे पर बैठे थे। तभी गांव के अमोल ने उससे जबरन पांच हजार रुपये मांगे। न देने पर अमोल व उसके पिता भगवान सिंह ने रामपाल को पकड़कर उसके पेट में चाकुओं से कई वार किए। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल से झांसी मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया। जहां दस दिन उसका इलाज चला। रामपाल के पिता हरनारायण ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सोमवार को इस मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद अपर जिला सत्र न्यायाधीश डकैती सुरेश चंद्र की अदालत ने अमोल व उसके पिता भगवान सिंह को दस-दस साल की कैद और पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की पचास फीसदी राशि वादी को देने का भी आदेश अदालत ने दिया।