योग दिवस पर किसानों ने झांसी-कानपुर हाईवे पर बड़ागांव के पास चादर बिछाकर आसन जमा लिया। इससे दोनों ओर का यातायात बाधित हो गया। मध्य प्रदेश में किसानों पर हुई फायरिंग का विरोध करते हुए किसानों ने केंद्र सरकार को जमकर कोसा। पुलिस हटाने पहुंची तो किसान नेताओं की पुलिस से तीखी झड़प हुई। करीब डेढ़ घंटे बाद किसान हाईवे से हटे और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।
बुधवार की सुबह करीब नौ बजे भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले करीब ढाई सौ किसान बड़ागांव स्थित हाईवे पर पहुंचे। बीच सड़क सड़क पर किसानों ने आसन जमा लिया। इससे दोनों ओर कार, बसों और ट्रकों की लाइन लग गई। किसान नेता बलराम लंबरदार ने कहा कि मध्य प्रदेश में निर्दोष किसानों को पुलिस ने बेवजह गोलियों का निशाना बनाया। इस गोलीकांड की सीबीआई जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
साथ ही किसानों पर दर्ज मामले भी वापस लिए जाएं। प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि फसलों और सब्जियों का न्यूनतम, समर्थन मूल्य घोषित कर खरीद सुनिश्चित की जाए और सरकार स्थिरता कोष का गठन करे। इसके अलावा किसानों पर साहूकारों, सरकारी और सहकारी बैंकों का जो कर्ज है, उसे माफ किया जाए। जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत के मुताबिक कृषि आयात और अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए।
इस बीच सीओ सिटी भी फोर्स के साथ पहुंच गए और किसानों को हटाने लगे। इस पर किसानों और पुलिस में तीखी झड़पें र्हुइं। करीब 11 बजे किसानों ने हाईवे छोड़ा और कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगों का ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। इस मौके पर शिव बालक, रामकुमार पटेल, डॉ. विजेंद्र, केदारनाथ, सुरेश चौहान, भगवान दास भी मौजूद रहे।
इमरजेंसी वाहनों को ही दिया रास्ता
सुबह के वक्त जाम के दौरान किसानों ने सिर्फ इमरजेंसी वाहनों, एंबुलेंस, सेना की गाड़ी, दूध और दवा की गाड़ियों को ही आने-जाने दिया। हाईवे पर करीब दो घंटे तक किसानों के नारे गूंजते रहे।
कार, बस में सवार बच्चों को पिलाया दूध
किसानों में जाम में फंसी बसों और कारों में सवार लोगों खासतौर पर बच्चों का खास ध्यान रखा। किसानों ने बच्चों को दूध और अन्य लोगों को पानी भी दिया, ताकि आम लोगों को ज्यादा तकलीफ न हो।
बसों से उतरकर पैदल ही चल दिए यात्री
झांसी, उरई और मध्य प्रदेश की ओर जाने वाली बसें जब जाम में फंसीं यात्री परेशान हो गए। जिन यात्रियों को आसपास के किसी गांव तक ही जाना था, वे बसों से उतरकर पैदल ही चल दिए।