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अपने बच्चे मिले तो चेहरे खिले

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उरई। मानसिक कमजोर बालिका मां-बाप से बिछड़कर भटक रही थी। चाइल्ड लाइन टीम ने दो दिन की मशक्कत के बाद उसके मां-बाप को खोज निकाला और बालिका को सौंपा। गुम हुई बेटी को पाकर परिजनों की आंखें भर आईं।
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लापता और भटके बच्चों को अपनों तक पहुंचाने में चाइल्ड लाइन की स्थानीय टीम काम कर रही है। बीती 6 अप्रैल को समीपवर्ती बजीदा गांव में एक लावारिस बच्ची की सूचना चाइल्ड लाइन के आफिस पहुंची। चाइल्ड लाइन के कोआर्डिनेटर शिवमंगल सिंह, काउंसलर प्रवीणा यादव व कशिश वर्मा उसे अपने साथ ले आए। चाइल्ड लाइन ने सोशल मीडिया का सहारा लिया जिससे जालौन कोतवाली क्षेत्र के शेखपुर बुजुर्ग में उसके अभिभावकों तक उसकी जानकारी पहुंच गई।
इसके बाद बालिका के पिता चाइल्ड लाइन के आफिस आए। उन्होंने बताया कि बालिका 4 अप्रैल से घर से गायब थी जिससे वे बेहद परेशान थे। उन्होंने टीम को धन्यवाद दिया। बालिका को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाल कल्याण समिति के माध्यम से पिता को सुपुर्द कर दिया गया।
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उधर, जालौन संवाद के अनुसार, जनपद बांदा के कस्बा अतर्रा निवासी नंदलाल का परिवार उरई मार्ग पर एलआईसी कार्यालय के पीछे रहता है। नंदलाल का पांच वर्षीय बच्चा कन्हैया गुरुवार को कहीं लापता हो गया था। बालक शुक्रवार को एक व्यक्ति को रोता हुआ मिला। उसने बच्चे को कोतवाली पहुंचा दिया। पुलिस ने उसके डेरे पर जाकर बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बच्चे को पाकर परिजनों का चेहरा खिल गया।
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