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भगवान बुद्ध का जीवन अनुकरणीय

Sun, 22 May 2016 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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जयंती अवसर पर पीपल रोपते अध्यक्ष व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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जाटव समाज विकास महासभा की ओर से बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर तथागत बुद्ध केे जीवन पर प्रकाश डाला गया।
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ग्राम धंतौली स्थित डा. अंबेडकर पार्क में रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ महासभा अध्यक्ष रामशरण जाटव ने पीपल रोपित कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गौतम

बुद्ध का जन्म लगभग 2550 वर्ष पहले एक राज परिवार में ऐसे समय हुआ था जब अपने देश में जाति, भेद, हिंसा व द्वेष का बोलबाला था। राजघराने में पैदा होने के बावजूद गौतम बुद्ध ने सभी शाही सुखों को त्याग कर मानवतावादी विचारधारा का मार्ग प्रशस्त किया। संचालन कर रहे महामंत्री लक्ष्मीनारायन जाटव ने गौतम बुद्ध के बताए हुए रास्ते पर चलने के लिए
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प्रेरित किया।   पूर्व प्रधानाचार्य माताप्रसाद प्रजापति, रामसनेही बाबू ने कहा कि गौतम बुद्ध ने राजशाही ठाठबाट का परित्याग किया। नगर अध्यक्ष मनमोहन सिंह व मनोज चौधरी ने तथागत को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए अपने जीवन में उनके सिद्धांतों को अपनाने पर बल दिया। अंजू चौधरी, मोहन मौर्य, वीरेंद्र सिंह, तुलसीदास, ओमप्रकाश, कैलाश उर्फ बद्रीप्रसाद

ने संबोधित किया। कार्यक्रम में रीतेश व वर्षा ने भगवान बुद्ध के गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर राजेश जाटव, देवकीनंदन आदि मौजूद रहे। उधर, इकलासपुरा स्थित टीचर्स कालोनी में आयोजित कार्यक्रम में प्रहलाद नारायन ने बुद्ध वंदना व त्रिशरण पाठ कराया। डीपी वर्मा ने बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डाला। महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा का दिन विशेष

मंगलकारी व महत्वपूर्ण है। पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि विजय चौधरी ने कहा कि बुद्ध के मार्ग का अनुसरण कर व्यक्ति जीवन के हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।  इस मौके पर बसपा

जिलाध्यक्ष शैलेंद्र शिरोमणि, आरएन गौतम, गुरुदयाल कुशवाहा, सीताराम वर्मा, मनीराम भास्कर, रामप्रकाश आदि ने संबोधित किया। उधर पंचशील बुद्ध बिहार में भी पूर्व मंत्री चैनसुख भारती की अध्यक्षता में बुद्ध पूर्णिमा पर कार्यक्रम हुआ।  

‘बुद्ध व्यक्ति नहीं विचार है’
भगवान बुद्ध की जयंती यहां सेठ बद्रीप्रसाद स्मृति महाविद्यालय में मनाई गई जिसमें वक्ताओं ने बुद्ध के विचारों को व्यापक दृष्टिकोण में अपनाने की आवश्यकता बताई। वक्ताओं ने कहा कि आज के परिवेश में बुद्ध एक ऐसा विचार है जो वैश्विक परिदृश्य में प्रासंगिक है। महात्मा बुद्ध और मां सरस्वती की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करने से प्रारंभ हुई संगोष्ठी में छात्र विपिन
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सुनायां ने कहा कि बुद्ध ऐसी विचारधारा है जो समूचे एशिया महाद्वीप को एक सूत्र में पिरोती है। महाविद्यालय के कोऑर्डीनेटर कन्हैया नीखर एवं अन्य स्टाफ ने भी विचार व्यक्त किए। शिवकुमार गुर्जर जुझारपुरा, ब्रजेंद्र सिंह, जय निरंजन, अखिलेश चौहान, विवेक श्रीवास्तव, कदीम, मुश्ताक अहमद, राजकुमार आदि मौजूद रहे। संचालन मनोजकुमार सिंह ने किया।
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