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क्वारंटीन होने के बाद भी डॉक्टर हत्या करने के लिए पहुंचा था आगरा

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ॉक्टर से बरामद चाकू - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। जिला अस्पताल में मेडिकल आफीसर के पद पर कार्यरत डॉक्टर ने कोरोना संक्रमण की परवाह न करते हुए आगरा जाकर महिला डॉक्टर योगिता की हत्या को अंजाम दिया। डॉ विवेक 3 से 14 अगस्त तक मंगरौल स्थित पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में बतौर कोरोना प्रभारी के पद पर कार्यरत था। इसके बाद उसे 15 से 21 अगस्त तक अपने सरकारी आवास पर ही क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी विवेक 18 अगस्त को घर से निकलकर न सिर्फ आगरा पहुंचा, बल्कि वहां महिला डॉक्टर की हत्या को अंजाम दिया।
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बुधवार की देर शाम जैसे ही आगरा पुलिस जनपद पहुंची और कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए सहयोग मांगा, वैसे ही आलाधिकारियों के निर्देश पर दोनों जिलों की टीम उसके सरकारी आवास पहुंची, जहां पर उन्हें विवेक मिल भी गया। हालांकि पुलिस ने लिखापढ़ी में डॉक्टर के पकड़े जाने के स्थान का कोई जिक्र नहीं किया है। सिर्फ जालौन पुलिस का सहयोग ही लिखापढ़ी में दिखाया है। इसके बाद आनन फानन में आगरा की टीम विवेक को लेकर रवाना भी हो गई। जिले के पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि विवेक पर डॉ योगिता की हत्या के साथ साथ क्वारंटीन नियमों के उल्लघंन का मामला भी दर्ज होना चाहिए, क्योकि न जाने कितने लोगों की जिंदगी के साथ आरोपी ने खिलवाड़ किया होगा।
दो साल से जिले में कार्यरत था डॉक्टर
डॉ विवेक तिवारी की पहली तैनाती मई 2018 में नियत वेतनमान पर जिले के आटा क्षेत्र के पीएचसी में हुई थी। इसके एक सप्ताह बाद ही जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का मेडिकल आफिसर नियुक्त कर दिया गया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2020 को डॉ. विवेक की जिला अस्पताल में स्थायी तैनाती हुई थी। हाल ही में जब कोरोना ने महेबा ब्लाक के मंगरौल स्थित पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में पैर पसारने शुरू किए तो डॉ विवेक को ही टीम के साथ प्रभारी बनाकर पीटीएस भेजा गया। 3 अगस्त से 14 अगस्त तक डॉ विवेक पीटीएस में ही कार्यरत रहे थे।
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सम्मान मिलते ही कॅरियर पर लगा लिया दाग
अभी 6 दिन पहले ही यानि 14 अगस्त को ही मंगरौल स्थित पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में कोरोना योद्धा की भूमिका निभाने पर स्वास्थ्य और पीटीएस के अधिकारियों ने डॉ विवेक को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। किसी को नहीं पता था कि सम्मानित होने के बाद ही डॉक्टर अपने हाथ डॉक्टर योगिता के खून से रंग लेगा। जिससे उसके कैरियर पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा। जिला अस्पताल के डॉक्टरों को भी विवेक की इस हरकत पर यकीन नहीं हो रहा है। किसी को गुस्सा था तो कोई विवेक के कैरियर पर अफसोस जता रहा था। सभी का कहना था कि यह कैसा प्यार है कि किसी की जान ही ले ले।
दोस्तों ने डिलीट किए मैसेज और फोटो
जैसे ही गुरुवार को डॉ विवेक के हत्यारोपी होने की चर्चा तेज हुई तो डॉक्टर से जुड़े उनके करीबियों ने अपने मोबाइल से उनके मैसेज और उनके साथ की अपनी तस्वीरें डिलीट करनी शुरू कर दी। सबको यही डर था कि कहीं वे भी पुलिस की पूछताछ में न फंस जाए।
योगिता का भी जालौन था आना जाना
जिला अस्पताल में डॉ विवेक के करीबियों ने दबी जुबान से सिर्फ इतना ही बताया कि योगिता भी एक दो मर्तबा आरोपी डॉक्टर से मिलने जालौन आ चुकी है, लेकिन विवेक ने कभी किसी से योगिता की मुलाकात भी नहीं कराई।

डॉ विवेक तिवारी की फाइल फोटो- फोटो : ORAI

मृतका डॉ योगिता गौतम की फाइल फोटो- फोटो : ORAI

पीटीसी मगरोल में डॉ विवेक तिवारी को सम्मानित करते एसपी पीटीसी आरएन भारद्वाज- फोटो : ORAI

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