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Jalaun News: बिजलीघर सामने करोड़ों की नजूल भूमि पर कब्जा

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फोटो 35 प्रशासन की ओर से लगाया गया बोर्ड। संवाद
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जालौन। नगर की सबसे मूल्यवान शासकीय संपत्तियों में शामिल पुराने बिजलीघर के सामने स्थित नजूल भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। करीब 100 से 150 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे के आरोपों की जांच के बाद उप जिलाधिकारी रिंकू सिंह राही ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में पूरे मामले की एसआईटी जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने की सिफारिश की गई है। प्रशासनिक गलियारों में रिपोर्ट पहुंचते ही हड़कंप मच गया है। इस पर करीब तीन लोग अपना स्वामित्व बताते हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार जालौन नगर स्थित पुराने बिजलीघर के सामने की विवादित भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल अर्थात शासकीय संपत्ति के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद इस भूमि पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराया गया। प्रारंभिक जांच में करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में आठ फीट तक गहरी खोदाई किए जाने की पुष्टि हुई है। इससे आसपास के मकानों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों ने भवनों में दरारें आने और भविष्य में बड़े नुकसान की आशंका जताई है।
जांच में यह भी सामने आया कि भूमि पर स्वामित्व का दावा करने वाले पक्ष ने पुराने दस्तावेजों और नक्शों का सहारा लिया, लेकिन उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर इन दस्तावेजों को स्वामित्व का वैध प्रमाण नहीं माना गया। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि नगर पालिका से नक्शा स्वीकृत होना अथवा कर निर्धारण रजिस्टर में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को भूमि का मालिक नहीं बना देता, खासकर तब जब राजस्व रिकॉर्ड भूमि को सरकारी संपत्ति बताते हों।
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मामले की गंभीरता इस कारण भी बढ़ गई है कि रिपोर्ट में कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि सरकारी भूमि पर कब्जे को वैध साबित करने और प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने के प्रयास किए गए। इसी आधार पर एसडीएम ने पूरे प्रकरण में भूमिका निभाने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि स्थायी रूप से निजी कब्जे में चली जा सकती है। इसी वजह से इसे सामान्य राजस्व विवाद न मानते हुए उच्चस्तरीय जांच का विषय बताया गया है।
उप जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति में अवैध निर्माण तत्काल बंद कराने, कब्जा हटाने, संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। अब इस बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



जांच हुई तो कई चेहरे बेनकाब होने की चर्चा

नगर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि यदि राजस्व अभिलेखों, निर्माण स्वीकृतियों, कर निर्धारण रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की गहराई से जांच हुई तो कई प्रभावशाली लोगों के साथ कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं। यही कारण है कि एसआईटी जांच की मांग को इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
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नजूल की जमीन पर कब्जे की जांच करवाने के बाद उन्होंने जिलाधिकारी को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है। रिंकू सिंह राही, एसडीएम जालौन
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