इप्टा की प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर रंगकर्मियों से ऑनलाइन बात करते प्रशिक्षक
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कोंच। फिल्म एवं टीवी अभिनेता आरिफ शहडोली ने कहा है कि रंगकर्म और रंगकर्मियों को प्रोत्साहित करना समाज की भी जिम्मेदारी है। रंगकर्मियों की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समाज में टिकट लेकर नाटक देखने की परंपरा विकसित करनी चाहिए। इस वक्त नुक्कड़ नाटकों की परंपरा को और अधिक सक्रिय करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक असहमति का सम्मान किया जाना जरूरी है। वैचारिक असहमति का एक रूप नाटक का मंचन भी है। यह बात उन्होंनेे भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) कोंच इकाई के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन थिएटर समापन कार्यक्रम में कही।
मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार महेंद्र भीष्म ने कहा कि नाटक जन जाग्रति का सशक्त माध्यम है। नाटकों के मंचन के माध्यम से रंगकर्मी सामाजिक बदलाव में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं शॉर्ट फिल्म निर्माता डॉ. आलोक सोनी ने कहा कि नाटक के माध्यम से कलाकार विकारों को दूर कर एक अच्छे इंसान की जिम्मेदारी को निभाता है। टीवी धारावाहिकों क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया के कलाकार बृजेश मौर्य ने भी रंगकर्मियों को संबोधित किया।
कार्यशाला प्रशिक्षक आरिफ शहडोली को भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक की स्मृति में इप्टा कोंच द्वारा दिए जाने वाले जुगल किशोर स्मृति नाट्य निर्देशक सम्मान से सम्मानित किया गया। संचालन कार्यशाला संयोजक एवं इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नईम बॉबी ने किया। संरक्षक अनिल कुमार वैद ने स्वागत एवं रंगकर्मी पारसमणी अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। रंगकर्मी यूनुस मंसूरी, राज शर्मा ने जनगीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर शेख अरशद, मेघा झा, धीरेन्द्र कुमार वर्मा, ट्रिंकल राठौर, अमन खान, अनायिका, पूजा पटेल, सैंकी यादव सहित इप्टा कोंच, झांसी, उरई, छतरपुर के रंगकर्मी उपस्थित रहे।