कोंच (जालौन)। कस्बे के बहुचर्चित सराफा व्यापारी लूटकांड में पुलिस ने 11 दिन बाद सफलता पाई है। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान तीन बदमाशों को पैर में गोली मारकर घायल कर दिया। उनके पास से लूटे गए जेवर, तमंचे, कारतूस व बाइक बरामद हुई है। पुलिस ने घायलों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है।
कोंच में 15 मई को बीच बाजार स्थित नवीन ज्वैलर्स की दुकान में घुसे छह नकाबपोश बदमाशों ने दिनदहाड़े दुकानदार संजीव कुमार सोनी से तमंचे के बल पर जेवरात लूट लिए थे और भाग गए थे। घटना से व्यापारियों में पुलिस के प्रति आक्रोश व्याप्त था। खुलासे के लिए जिले के साथ-साथ झांसी की टीमों को भी लगाया गया था। सोमवार रात कैलिया थाना प्रभारी अतुल कुमार चेकिंग कर रहे थे, तभी एक बाइक पर तीन संदिग्ध घुसिया से पहाड़गांव की ओर जाते दिखे।
पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में पुलिस ने तीनों को पैर में गोली मारकर पकड़ लिया। उन्होंने अपने नाम झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र के करई गांव निवासी राजवीर गोस्वामी, रामेंद्र उर्फ रामू पाल व रानू कुशवाहा बताए।
पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि 15 मई को अपने तीन साथियों के साथ कोंच में लूट की घटना को अंजाम दिया था। पुलिस को बदमाशों के पास से लूटे गए चांदी के दो सिंहासन व एक सोने की अंगूठी, तीन तमंचा, पांच जिंदा कारतूस, एक काले रंग की बाइक भी बरामद की। उन्होंने बताया कि वह चांदी के सिंहासन व सोने की अंगूठी बेचने जा रहे थे, तभी पुलिस ने पकड़ लिया।
सूचना पर एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मौका मुआयना किया। एसपी ने बताया कि मुठभेड़ में घायल बदमाश फिलहाल ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उनके ठीक होने के बाद विस्तृत पूछताछ की जाएगी। एसपी ने बदमाशों को पकड़ने वाली टीम को 25,000 हजार रुपये का इनाम देने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि पुलिस की टीमें अब तीन अन्य फरार बदमाशों की धड़पकड़ में तेजी से जुट गई है। जल्द अन्य तीनों बदमाशों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नहीं किया मोबाइल का प्रयोग, न नकाब खोला
लूटकांड में शामिल बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में कई राज खोले हैं। बताया कि उन्होंने जिस दिन वारदात की वह उस दिन ही झांसी की ओर से आए थे। आने जाने के दौरान उन्होंने अपना नकाब नहीं खोला। इसके साथ ही कोई मोबाइल भी नहीं लिए था। वारदात के बाद दोनो बाइकें अलग-अलग रूट से निकाली थी। इससे पुलिस जल्दी न पकड़ सके।