उरई। बिजली कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण होने पर किसानों को मुफ्त बिजली नहीं दी जाएगी। साथ ही आम लोगों तक भी बिजली का पहुंचाना मुश्किल होगा। लोगों को केवल सपनों में ही बिजली मिलने की संभावना रहेगी। निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों ने नारेबाजी कर इसका विरोध किया और लगभग तीन घंटे तक काम बंद रखा।
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन व संयुक्त संघर्ष समिति ने मंगलवार दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एकजुट होकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाया। जगदीश वर्मा ने बताया कि फिलहाल चर्चा है कि बिजली दरें दुगुनी होने वाली हैं। निजीकरण होने पर इसका असर अधिक होगा, गरीब लोगों तक बिजली पहुंचाना मुश्किल होगा और आम जनता मात्र सपनों में ही इसका उपयोग कर पाएगी।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि पहले ही दुगुने दर लागू होने की बातें आ रही हैं। इसके बाद किसानों की मुफ्त बिजली भी समाप्त किया जाना तय है। यह लड़ाई केवल बिजली कर्मचारियों की नहीं, आम जनता और किसानों की भी है। अगर इसका विरोध नहीं किया गया, तो बिजली आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान परमात्मा शरण, नवीन कंजोलिया,देवेन्द्र सिंह, मयंक बाजपेयी,गौरव पटेल, राजेश कुशवाहा, भूपेंद्र, सत्य प्रकाश मौजूद रहे।