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40 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद

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जालौन। रविवार को जिले में हुए तीसरे चरण के चुनाव में तीनों विधानसभाओं के 40 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। देर रात से प्रत्याशियों के साथ उनके समर्थक और आम जन भी जीत-हार का गुणा-भाग लगाने लगे हैं।
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उरई विधानसभा
पिछली बार से 0.1 प्रतिशत कम मतदान
उरई। कालपी विधानसभा क्षेत्र में इस बार 60.9 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछली बार 61 फीसदी मतदान हुआ था। इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे कुल 14 प्रत्याशियों का राजनीतिक भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। यहां कुल 3,92,694 मतदाता हैं। इसमें करीब 61 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वर्ष 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के नरेंद्र सिंह जादौन चुनाव जीते थे। इस बार गठबंधन के खाते में सीट जाने से निषाद पार्टी से पूर्व विधायक छोटे सिंह प्रत्याशी बनाए गए हैं। बसपा से श्याम पाल उर्फ छुन्ना, सपा से विनोद चतुर्वेदी, कांग्रेस से उमाकांति सिंह सहित 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस सीट पर पिछली बार वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह जादौन को 1,05,598 मत मिले थे। उन्होंने बसपा प्रत्याशी के रूप में छोटे सिंह को हराया था। छोटे सिंह को 54,500 मत मिले थे। इस बार भी लड़ाई भाजपा गठबंधन, सपा और बसपा के बीच है।
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कालपी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
कालपी। विधानसभा क्षेत्र में सपा, बसपा व भाजपा गठबंधन प्रत्याशी के बीच त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला रहा है। मुस्लिम मतदाताओं का रुझान साइकिल की ओर देखते ही दोपहर बाद क्षत्रिय और वैश्य मतदाताओं की लामबंदी भाजपा गठबंधन प्रत्याशी की ओर दिखने लगी। ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव सजातीय प्रत्याशी होने की वजह से साइकिल की ओर ज्यादा रहा तो निषाद मतदाताओं का रुझान भाजपा गठबंधन प्रत्याशी की ओर रहा। मुस्लिम व यादव मतदाताओं को छोड़कर पाल आदि अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का रुझान बसपा में दिखाई दिया। किसी ब्लाक में बसपा तो किसी ब्लाक में भाजपा गठबंधन मुख्य लड़ाई में रहा। कालपी नगर में साइकिल की रफ्तार तेज रही। उधर, मतदान विशुद्ध रूप से दलगत व जातीय आधार पर हुआ। मतदान में किसी भी मुद्दे का जोर नहीं दिखाई दिया।
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उरई में 13 प्रत्याशी लगाने लगे गणित
उरई। उरई विधानसभा क्षेत्र से इस बार 61.10 प्रतिशत मतदान हुआ है। इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे 13 प्रत्याशियों का राजनीतिक भाग्य ईवीएम में बंद हो गया है। यहां कुल 4,43,292 मतदाता है। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के गौरीशंकर वर्मा चुनाव जीते थे। भाजपा ने उन्हें दूसरी बार फिर प्रत्याशी बनाया है। उनके मुकाबले में सपा से दयाशंकर वर्मा, बसपा से सतेंद्र प्रताप उर्फ श्रीपाल, कांग्रेस से उर्मिला सोनकर खाबरी समेत 13 प्रत्याशी हैं। पिछले चुनाव में गौरीशंकर वर्मा ने 1,40,885 मत पाकर सपा प्रत्याशी महेंद्र कठेरिया को हराया था। महेंद्र को 63 हजार मत मिले थे। तब 63 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार गौरीशंकर वर्मा का सीधा मुकाबला सपा प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा से दिखाई दे रहा है। बसपा प्रत्याशी भी अपने आधार वोट बैंक के भरोसे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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माधौगढ़ में भी रोचक मुकाबला
उरई। माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जिले में सबसे कम मतदान हुआ। यहां पर 58 फीसदी मतदान हुआ है। इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया है। इसी सीट पर कुल 4,42,552 मतदाता हैं। भाजपा ने मूलचंद्र निरंजन को फिर से प्रत्याशी बनाया है। बसपा से शीतल कुशवाहा, सपा से राघवेंद्र सिंह, कांग्रेस से सिद्धार्थ दीवौलिया समेत 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मूलचंद्र निरंजन ने 1,08,737 मत पाकर बसपा प्रत्याशी गिरीश अवस्थी को हराया था। गिरीश अवस्थी को 62,752 मत मिले थे। यह सीट बसपा का गढ़ मानी जाती रही है। यहां दलित मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। इसमें कोंच का अधिकांश भाग जुड़ा हुआ है। मुख्य लड़ाई सपा और बसपा के बीच है। इस बार भाजपा प्रत्याशी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगे हुए हैं।
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