उरई। जीआईसी पुस्तकालय भवन में शिक्षक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतिभागियों को पढ़ाने के लिए अपना समय दे रहे हैं। डीएम डॉ. मन्नान अख्तर के अलावा उनकी टीम के कई अधिकारी भी समय निकाल कर प्रदेश भर में मॉडल बनने जा रहे इस मार्गदर्शन केंद्र में पढ़ाने के लिए पहुंचते हैं। शुक्रवार को एसडीएम सदर सतेंद्र कुमार ने छात्र-छात्राओं को विदेश नीति और इतिहास की जानकारी दी। एसडीएम का कहना है कि वे सप्ताह में दो-तीन दिन इन प्रतिभागियों को पढ़ाने का प्रयास जरूर करते हैं। फिलहाल वे जून में होने वाली पीसीएस की परीक्षा के लिए इन प्रतिभागियों को तैयार कर रहे हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन साल पहले शुरू किया गया केंद्र अब मॉडल के रूप में सामने आया है। इसे प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी जिलों में लागू करने का विचार किया जा रहा है। इस मार्ग दर्शन केंद्र में जरूरतमंद मेधावियों को निशुल्क शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारने का काम किया जा रहा है। शिक्षकों के साथ अधिकारियों से मिलने वाली शिक्षा हासिल कर छात्र-छात्राएं भी काफी उत्साहित हैं। डीआईओएस भगवत पटेल ने बताया कि एसडीएम सदर के अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी, बीडीओ डकोर आदि भी समय निकालकर मार्ग दर्शन केंद्र छात्र छात्राओं को पढ़ाने के लिए आते हैं।
यूपीएससी और स्टेट पीसीएस की तैयारी कर रहीं इंद्रानगर निवासी छात्रा आंचल दूरवार ने बताया कि उनके पिता किसान है और दो बहनें प्राइवेट टीचर हैं। वे प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। मार्गदर्शन केंद्र में शुल्क लेकर पढ़ाने वाली कोई भावना ही नहीं दिखाई देती है। शायद यही वजह है कि यहां की पढ़ाई भी अच्छे से समझ में आती है।
कोंच के राहुल याज्ञिक ने बताया कि पिता का देहांत हो चुका है, बड़े भाई सैलून की दुकान चलाते हैं। महंगी कोचिंग पढ़ना संभव नहीं था, ऐसे मार्गदर्शन केंद्र उनके जैसे कई प्रतिभागियों के लिए परीक्षा की तैयारी कराने का बेहतर माध्यम साबित हो रहा है। अधिकारियों के अनुभवों का भी लाभ मिल रहा है।
अधिक से अधिक प्रतिभागी सफल हो
एसडीएम सदर सतेंद्र कुमार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने में कोई कमी न रह जाए। अधिक से अधिक प्रतिभागी सफल हो, इसलिए वे भी डीएम के निर्देश पर इन प्रतिभागियों को पढ़ाने आते हैं। अपने अनुभव और संबंधित विषयों की बारीकियां इन सभी के बीच साझा कर बहुत अच्छा लगता है। मेधावियों को काफी लाभ भी पहुंच रहा है।
परिषदीय विद्यालय के शिक्षक डॉ विजय कृष्ण का कहना है कि वे समझते हैं कि खुश रहने के लिए बहुत से पैसों की जरूरत नहीं है, उन्हें इन जरूरतमंद मेधावियों को ज्ञान देकर भी बहुत सी खुशी महसूस होती है। डीएम ने भरोसा करके ही इन्हें सुपुर्द किया है, इसलिए कोई कमी भी रहने पाए, बस यही प्रयास रहता है।