नगर के भुंजरया हनुमान मंदिर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक पं. स्वामी शिव शंकरानंद सरस्वती ने परमात्मा के विभिन्न अवतारों की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है या भक्तों पर संकट आता, परमात्मा अवतरित होते हैं।
गजेंद्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्राणिमात्र को केवल परमात्मा पर ही विश्वास करना चाहिए। सांसारिक बंधन तो स्वार्थ पूर्ण होते हैं। ग्राह ने जब गजेंद्र को सरोवर में खींच लिया तो उस समय वहां उपस्थित गजेंद्र के परिवार के किसी भी सदस्य ने उसकी सहायता नहीं की।
उसने करुणामय परमात्मा का स्मरण किया और भगवान ने एक पल की भी देर लगाए बगैर गजेंद्र को ग्राह के बंधन से मुक्त करा दिया। उन्होंने राम अवतार की कथा में बताया कि जब पृथ्वी पर रावण का अत्याचार बढ़ा तो भगवान ने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां अवतार लेकर पृथ्वी को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त कराया।
इस दौरान उन्होंने कृष्णावतार की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कंस के बढ़ते अत्याचारों से पृथ्वी कराहने लगी। वह गोरुप धारण कर क्षीर सागर में शेष शैया पर विराजमान श्रीहरि के समक्ष गई और बढ़ते पापाचारों का वर्णन करते हुए राक्षसों के भार से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना की।
परमात्मा ने सोलह कलाओं के साथ मथुरा स्थित कंस के कारागार में देवकी और वासुदेव के यहां अवतार लिया। कथा समाप्ति पर प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान कथा के परीक्षित विजय शंकर मिश्र व पार्वती देवी ने श्रीमद्भागवत कथा पुराण की आरती उतारी।