उरई (जालौन)। चबूतरे को लेकर हो रहे विवाद में बहू अपनी एक साल की बेटी को लेकर पहुंच गई। तभी चचिया ससुर ने उसे धक्का दे दिया। इससे मासूम जमीन में गिरकर लहूलुहान हो गई। परिजनों ने उसे मेडिकल कालेज पहुंचाया। जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना से खलबली मच गई।
शहर कोतवाली क्षेत्र के बिनौरा गांव निवासी परशुराम बरार का अपने चाचा भूप सिंह से चबूतरे को लेकर करीब तीन माह से विवाद चल रहा है। जिसकी शिकायत उसने कई बार अधिकारियों व थाना पुलिस से की। लेकिन कोई समधान नहीं हुआ। गुरुवार को भूप सिंह व परशुराम के बीच चबूतरे को लेकर फिर से विवाद होने लगा। किसी ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर वापस लौट गई।
देर शाम भूप सिंह फिर से विवाद करने लगा। इस पर परशुराम की पत्नी विनीता अपनी एक वर्ष की बेटी नंदनी को गोद में लेकर घर के बाहर आ गई। तभी उसने गाली गलौज का विरोध किया तो भूप सिंह ने उसे धक्का दे दिया। इससे गोद से नंदनी नीचे सड़क पर गिर गई। सिर में गंभीर चोटें लगने से वह लहूलुहान हो गई। परिजन उसे लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे, जहां इलाज के दौरान नंदनी की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि परशुराम मजदूरी करता है। उसकी दो बेटियां में परी व नंदनी हैं। मासूम की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया है। कोतवाली प्रभारी अजय ब्रह्म तिवारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच पड़ताल की जा रही है। अभी तक परिजनों ने तहरीर नहीं दी है।
तीन बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
उरई। मृत मासूम के परिजनों की मानें तो तीन माह से घर के पास बने चबूतरे को लेकर विवाद चल रहा है। परशुराम ने दो बार कोतवाली पुलिस व एक बार समाधान दिवस में इसकी शिकायत की। लेकिन इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारी समस्या का समाधान करा देते तो शायद मासूम की जान न जाती। मासूम की मौत से ग्रामीणों में जिम्मेदारों के प्रति आक्रोश है।
दो घंटे पहले ही पुलिस मामला शांत करवाकर लौटी थी
भूप सिंह व परशुराम के बीच तीन माह से चबूतरे को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों चबूतरे पर अपना अधिकार बता रहे हैं। गुरुवार को जब विवाद हुआ तो पुलिस गांव पहुंची और दोनों पक्षों को विवाद न करने की हिदायत दी और लौट आई। दो घंटे भी नहीं बीते कि फिर से विवाद होने लगा और धक्का लगने से मासूम की मौत हो गई।