रामपुरा। जालौन जिले के बीहड़ क्षेत्र रामपुरा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले वैज्ञानिक व शोधकर्ता डॉ. राहुल पुरवार आज लाखों कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं। ब्लड कैंसर के इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने वाली स्वदेशी सीएआर-टी सेल थैरेपी विकसित करने अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. राहुल का सपना अपने गृह क्षेत्र रामपुरा या जालौन जिले में एक आधुनिक कैंसर अस्पताल स्थापित करना है।
आईआईटी मुंबई में प्रोफेसर एवं शोधकर्ता के रूप में कार्यरत डॉ. राहुल पुरवार ने विशेष बातचीत में बताया कि उनका लक्ष्य केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं, बल्कि कैंसर के इलाज को आम आदमी की पहुंच तक लाना है। उन्होंने कहा कि ब्लड कैंसर का इलाज वर्षों तक चलता है और मरीजों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में उनकी टीम द्वारा विकसित तकनीक मरीजों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग और बायरैक (बीआईआरएसी) के सहयोग से वर्ष 2021 में इस तकनीक का विकास किया गया। इसके बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल और आईआईटी मुंबई में क्लीनिकल ट्रायल किए गए। शुरुआती परीक्षण 18 मरीजों पर किए गए, जिनमें छह बच्चे भी शामिल थे। सभी में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। अब तक करीब 750 मरीज इस तकनीक से लाभान्वित हो चुके हैं।
विदेशी इलाज की तुलना में बेहद सस्ती भारतीय तकनीक
डॉ. राहुल बताते हैं कि विदेशों में इसी तरह की उन्नत थैरेपी की लागत करीब पांच करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि भारत में विकसित यह तकनीक लगभग 40 लाख रुपये में उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी संतुष्टि इस बात की है कि हमारी तकनीक से मरीजों को कम लागत में बेहतर इलाज मिल रहा है। उनका प्रयास है कि भविष्य में इसकी कीमत और कम हो, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति इसका लाभ उठा सके।
अब गैस्ट्रिक और ब्रेन कैंसर पर शोध
ब्लड कैंसर के क्षेत्र में सफलता के बाद डॉ. राहुल की टीम अब गैस्ट्रिक कैंसर और ब्रेन कैंसर के उपचार के लिए नई तकनीक विकसित करने में जुटी हुई है। इसके लिए अमेरिका में क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है। उनका मानना है कि यदि इन शोधों में भी सफलता मिलती है तो कैंसर उपचार के क्षेत्र में भारत एक नई मिसाल कायम करेगा।
दुनिया तक पहुंच रही भारतीय तकनीक
डॉ. राहुल के अनुसार, भारत में विकसित इस तकनीक को अब वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल सिप्ला के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को और अल्जीरिया जैसे देशों में लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। मैक्सिको सरकार के साथ भी समझौता हो चुका है, जबकि अमेरिका में लाइसेंसिंग की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका में मंजूरी मिल जाती है तो यह तकनीक दुनिया के अधिकांश देशों तक पहुंच सकेगी और लाखों कैंसर मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
राष्ट्रपति कर चुकी हैं राष्ट्र को समर्पित
डॉ. राहुल पुरवार के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी सीएआर-टी सेल थैरेपी को भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू राष्ट्र को समर्पित कर चुकी हैं। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इसे भारत की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। हाल ही में डॉ. राहुल पुरवार को देश के चुनिंदा नवाचारकों में शामिल करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे में भी आमंत्रित किया गया था। इस प्रतिनिधिमंडल में देश के लगभग 120 प्रमुख नवाचारी शामिल थे, जिनमें जालौन के डॉ. राहुल भी शामिल रहे।