उरई। प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर शुक्रवार को विराम लग गया। आरक्षण की सूची जारी करते हुए निर्वाचन आयोग ने सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों का आरक्षण घोषित कर दिया है। इसमें जिले की सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी है। इससे सामान्य जाति के कई बड़े नेताओं का जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के समीकरण गड़बड़ा गया है।
बता दें कि भले ही निर्वाचन आयोग के जिला पंचायत सीट के लिए आरक्षण का क्रम शुक्रवार को जारी किया है, लेकिन कई दिग्गज नेता चुनाव का बिगुल बजते ही अपने समीकरण बैठाने लगे थे। कई सामान्य जाति से जुड़े नेताओं ने तो अध्यक्ष बनने को लेकर लखनऊ में बड़े नेताओ की परिक्रमा शुरू कर दी थी और वह अपने को अध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदार मान रहे थे।
वहीं दूसरी ओर इस आरक्षण से अनुसूचित जाति के कई उम्मीदवारों की बाछे खिल गई है। आरक्षण का क्रम जारी होते ही उम़्मीदवारों ने क्षेत्र पंचायत की सीटों को लेकर गणित बिठाना शुरू कर दिया है। पिछली बार जिले की यह सीट सामान्य महिला वर्ग के खाते में थी, इस बार इसे अनुसूचित जाति के खाते में डाल दिया गया है। वहीं पार्टियों में भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। इससे जिले में चुनावी हलचल तेज हो गई है।