भारत सरकार की आधार कार्ड बनाए जाने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए डीआईओएस कार्यालय में डीआईओएस राजेंद्र बाबू की अध्यक्षता में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, बेसिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे, बेसिक शिक्षा विभाग में 6 से 14 वर्ष व माध्यमिक व महाविद्यालयों में पंजीकृत 14 से 35 वर्ष तक केे पंजीकृत अभ्यर्थियों केे आधार कार्ड बनाए जाने हैं।
इनके लिए जिले में आधार कार्ड बनाने वाली 10 एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें एक एजेंसी को शहर व अन्य 9 एजेंसियों को जिले के एक-एक ब्लाक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
लखनऊ से प्रशिक्षण देने केे लिए आए अंशुल श्रीवास्तव ने कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों को आधार कार्ड बनाने की योजना व तौर तरीकों की जानकारी दी। एक फार्मेट भी दिया। इसमें छात्र, पिता और माता का नाम, जन्मतिथि, मोहल्ला, गांव व शहर का नाम, तहसील, डाकघर, जिला, प्रदेश के अलावा पिन कोड भरा जाना है।
अंशुल श्रीवास्तव ने बताया कि इन जानकारी के अभाव में आधार कार्ड नहीं बन सकता है। इसमें फार्मेट में दी गई सभी जानकारी आधार कार्ड बनवाने वाले के पास होनी चाहिए। इसके अलावा दो वर्ष से छोटे बच्चों केे आधार कार्ड उनकेे अभिभावक के साथ बनाए जाएंगे।
कार्यशाला में उपस्थित एजेंसी धारकों को आधार कार्ड बनाने में आसानी हो, इसके लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि सभी को ब्लाक वाइस आंगनबाड़ी व सुपरवाइजरों के मोबाइल नंबरों की लिस्ट दी जएगी।
इस मौके पर खंड शिक्षाधिकारी आनंद भूषण, बाल विकास परियोजना अधिकारी हदय नारायन, विमलेश आर्या, वंदना वर्मा, पूजा त्रिपाठी, प्रधानाचार्य मुन्नीलाल आदि मौजूद रहे।