अपनी माल ढोने वाली गाड़ी के साथ धर्मेंद्र
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कदौरा (जालौन)। कुछ लोग हुनरमंद होते हैं तो कुछ लोगों का हौसला ही उनका हुनर होता है। कुछ ऐसा ही हौसला दिखाया है कदौरा कस्बे के मोहल्ला पुरवा निवासी धर्मेंद्र ने, जिन्होंने लॉकडाउन में अपनी सुपरवाइजर की नौकरी तो गंवाई पर हिम्मत नहीं। धर्मेंद्र ने कर्ज लेकर पुरानी बाइक खरीदी और उसे माल ढोने की गाड़ी बनाकर अब नया काम धंधा शुरू कर दिया है। धर्मेंद्र का कहना है कि नोएडा की कंपनी में तो 25 से 27 हजार रुपये महीने मिल जाते थे, यहां कुछ नहीं तो महीने के 10-12 हजार का जुगाड़ तो हो ही जाएगा।
धर्मेंद्र ने बताया कि वह नोएडा में दो साल से कंपनी (टेक महिंद्रा) में सुपरवाइजर की नौकरी कर रहा था। वह स्वयं ग्रेजुएट था, उस पर एक करीबी रिश्तेदार भी उसी कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत थे, लिहाजा नौकरी मिलने में कोई दिक्कत नहीं हुई। महीने का 22 हजार वेतन और रहने को कमरा मिला था। लॉकडाउन में काम बंद हुआ था तो वह 15 अप्रैल को कदौरा परिवार के पास लौट आया था।
14 दिन क्वारंटीन रहने के बाद उसने कुछ दोस्तों व रिश्तेदारों से कर्ज लेकर यहीं एक पुरानी बाइक खरीदी और उसे माल ढोने की गाड़ी बनाकर अब रोजाना के तीन से साढ़े तीन सौ रुपये की आमदनी कर ही लेता है। परिवार में बुजुर्ग माता पिता के अलावा विकलांग भाई-भाभी और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। सभी की जिम्मेदारी उसी के कंधे पर है। बकौल धर्मेंद्र अनलाक-1 के दौरान दो बार कंपनी से फोन भी आ चुका है पर परिवार वाले अब जाने नहीं दे रहे हैं।
जालौन जिले के कदौरा कस्बे में धर्मेंद्र अपने पूरे परिवार के साथ। - फोटो : ORAI