गांव रूरा से बंगरा तक पांच किमी सड़क जगह-जगह गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। ऐसे में इस सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। दोपहिया वाहन चालक अक्सर गिरकर चुटहिल होते रहते हैं। भारी वाहनों के गड्ढों में फंसने से उनके कलपुर्जे टूटफूट रहे हैं।
हाल यह है कि इस सड़क से निकलने में लोग कतराने लगे हैं। दूसरा रास्ता न होने पर ही मजबूरी में इधर से गुजरते हैं। आसपास के लोगों की माने तो संबंधित विभाग के बड़े अफसरों से कई मर्तबा सड़क की दशा सुधारने की मांग की गई, लेकिन आज सुनवाई नहीं हुई।
साथ ही लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही सड़क चलने लायक न बनी तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा। जालौन-बंगरा मार्ग कई वर्षों से खस्ताहाल है। लगभग दो वर्ष पहले जब इस मार्ग का निर्माण शुरू हुआ तो लोगों को थोड़ी आस बंधी।
जैसे-तैसे जालौन से रूरा तक की सड़क तो बन गई परंतु रूरा पहुंचते ही सड़क का निर्माण बंद कर दिया गया। तब से अब तक गांव रूरा से बंगरा तक पांच किलोमीटर का रास्ता जर्जर हाल में है। मौजूदा समय में इस सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़क के नाम पर सिर्फ गहरे गड्ढे, गिट्टी व धूल ही दिखाई देती है।
यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं दर्जनों दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं। वहीं बसों आदि में बैठे यात्री भी इस मार्ग पर लगने वाले झटकों से चुटहिल होते रहते हैं।
जालौन निवासी निसार अहमद, मोहम्मद जाकिर, शकील अहमद, मोहम्मद इस्माइल उर्फ पप्पू, हरीबाबू आदि बताते हैं कि उन्हें अपनी दुकानदारी के सिलसिले में प्रतिदिन जालौन से बंगरा आना-जाना पड़ता है। जालौन से रूरा तक लगभग 12 किमी की दूरी तय करने में तो उन्हें 15 से 20 मिनट तक का समय लगता है।
परंतु रूरा से बंगरा तक पांच किमी की दूरी तय करने में उन्हें लगभग एक घंटे का समय लग जाता है। इतना ही नहीं, उक्त मार्ग पर चलने में जरा सी भी असावधानी होने पर वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। समस्या से अजीज आए ग्राम रूरा व बंगरा के सैकड़ों ग्रामीणों ने मांग की कि यह सड़क जल्द से जल्द की दशा सुधारी जाए।