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आजादी में इप्टा का अतुलनीय योगदान

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कोंच। टीवी एवं फिल्म अभिनेता आरिफ शहडोली ने कहा कि भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) संगठन मात्र नहीं है। यह आधुनिक भारत का पहला सांस्कृतिक आंदोलन है, जो देश के कई हिस्सों में आज भी चल रहा है। इप्टा के सांस्कृतिक आंदोलन ने देश की आजादी में अपना अतुलीय योगदान दिया है। बगैर इप्टा के भारत में नुक्कड़ नाट्य आंदोलन की बात भी नहीं की जा सकती है। यह विचार उन्होंने इप्टा के स्थापना दिवस पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।
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वर्चुअल कार्यक्रम में इप्टा के प्रांतीय सचिव डॉ मोहम्मद नईम ने कहा कि इप्टा ने अपने स्थापना वर्ष से ही यह घोषित कर दिया था कि कला जनता के लिए है। इप्टा की स्थापना के समय वर्ष 1943 में बंगाल में अकाल पड़ा था। आज 73 वर्षों बाद बुंदेलखंड सहित देश के बारह राज्य सूखे, अकाल और भुखमरी की चपेट में है। ऐसे में रंगकर्मियों का उत्तरदायित्व और बढ़ जाता है। अध्यक्षता कर रहे इप्टा कोंच के सरंक्षक अनिल वैद ने कहा कि इप्टा, रंगमंच और भारतीय सिनेमा को हम अलग अलग नहीं देख सकते। ख्वाजा अहमद अब्बास, भीष्म साहनी, बलराज साहनी, नरगिस दत्त आदि की इप्टा, रंगमंच व भारतीय सिनेमा को देन अविस्मरणीय है। संचालन इप्टा सचिव पारसमणि अग्रवाल ने किया एवं आभार व्यक्त ट्विंकल राठौर ने जताया। इस दौरान पर राज शर्मा, साहना खान, रानी कुशवाहा, आस्था,प्रथम वाजपेयी, प्रिंसी, अंकुर, विशाल, तैय्यबा, पूजा, नेहा पटेल आदि ने सहभागिता की।
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