देश का सबसे शांत व पिछड़ा इलाका माने जाने वाले बुंदेलखंड के बेरोजगाराें को आतंकी व नक्सली हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी तसदीक माेंठ में पकड़ी गई बारूद से हो गई है। पुलिस व परिवहन विभाग की मिलीभगत से लग्जरी बसाें व ट्रकाें से बारूद सप्लाई की जा रही है। वर्ष 2002 में शहर के रेलवे स्टेशन के पार्सल घर से भारी मात्रा में
डेटोनेटर व बारूद पकड़ी गई थी। जिन आरोपियाें ने यह पार्सल कानपुर के लिए बुक कराया था उन्हाेंने अपना पता बजरिया लिखवाया था और जिस वाहन से वह पार्सल करने आए थे वह नंबर स्कूटर का निकला था। रामपुरा के टीहर गांव में एक माह पहले भारी मात्रा में बारूद बरामद हो चुकी है। एक महीने पहले रामपुरा के गांव टीहर में पुलिस व स्वाट टीम ने
छापा मारकर करीब एक ट्रक बारूद बरामद की थी। इसे शनिवार को लखनऊ के बम निरोधक दस्ते ने नष्ट कराया था। इसी तरह से तीन दिन पहले ही झांसी के माेंठ में भारी मात्रा में बारूद व डेटोनेटर मिले। पुलिस व एटीएस की जांच में निकल कर आया कि यह बारूद नक्सलियाें को सप्लाई की जाती है। सूत्राें की मानें तो इसका मास्टर मांइड एमपी के
टीकमगढ़ जिले के ओरछा से पूरे कारोबार का संचालन करता है। पुलिस व एटीएस टीम उसकी तलाश कर रही है। बारूद व डेटोनेटर की सप्लाई के लिए जालौन जिला सबसे मुफीद माना जा रहा है। एमपी के बार्डर से सटा होने से रामपुरा व माधौगढ़ के रास्ते बारूद बाहर भेजी जाती है। इसका खुलासा टीहर में पकडे़ गए लोगों ने भी किया था। बताया था कि वह
बीहड़ के रास्ते ग्वालियर से बारूद लाते हैं। पता चला है कि कानपुर से इंदौर आदि के लिए चलने वाली लग्जरी बसाें से भी सप्लाई की जाती है। सूत्र बताते हैं कि बस के संचालक रास्ते में हर थाना व कोतवाली पुलिस के अलावा परिवहन विभाग को भी फीलगुड कराते हैं। इससे इन बसाें की चेकिं ग भी नहीं होती है। बताते चलें कि शहर के रेलवे स्टेशन पर वर्ष
2002 में भी भारी मात्रा में विस्फोटक व डेटोनेटर को पार्सल घर से कानपुर के लिए बुक कराया गया था। बुक कराने वालाें ने अपना पता शहर का बजरिया बताया था। पार्सल घर स्टाफ ने उस कार का नंबर भी लिया था लेकिन वह जांच में स्कूटर का निकला था। इस मामले में अगर पुलिस व खुफिया विभाग ने कायदे से पड़ताल की होती तो बड़ा खुलासा हो
सकता था। अब माेंठ में बारूद व डेटोनेटर मिलने से यह तय माना जा रहा है कि आतंकी व नक्सली बुंदेलखंड की जमीन में पैर जमाने की फिराक में हैं। यह इलाका बीहड़ होने के साथ ही ऐसे रूट पर है जहां से दिल्ली से लेकर भारत के हर कोने के लिए ट्रेन व बसें आसानी से मिल जाती है। इस हिसाब से भी मुफीद है। खुफिया टीम अगर सक्रियता दिखाए तो कई राजफाश हो सकते हैं।
70 संदिग्धों की बनाई लिस्ट-आईजी एटीएस
एटीएस के आईजी असीम अरूण ने बताया कि झांसी में पकड़ा गया डेटोनेटर व बारूद नक्सलियाें को सप्लाई किया जाता था। उन्हाेंने करीब 70 संदिग्धाें की लिस्ट बनाई है। उनके साथ एमपी की एटीएस भी सहयोग कर आरोपियाें की तलाश कर रही है। पूरे रैकेट का जल्द ही खुलासा कर कार्रवाई की जाएगी।
एमपी से आती बारूद की खेप
टीहर गांव में बारूद के जखीरे के साथ पकड़े गए आरोपियाें ने पुलिस को बताया था कि वह यह बारूद ग्वालियर से लाते हैं। रास्ते में पुलिस को पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं। अपने लाइसेंस को दिखाकर प्रतिबंधित बारूद लाते थे।
लग्जरी बसें बनती हैं जरिया
कानपुर से इंदौर व ग्वालियर से लेकर जयपुर तक चलने वाली बसाें से अवैध सामान की तस्करी आसानी से हो जाती है। इसकी बानगी पिछले दिनाें देखने को मिली थी जब कालपी बस स्टैंड पर इसी बस से टैक्स चोरी कर ले जाई जा रही सुपारी पकड़ी गई थी। इ
डकैताें के एजेंट बनकर कमाते थे पैसे
बीहड़ में डकैतों की सक्रियता के समय युवा उनके एजेंट बन जाते थे। उनके एजेंट बनकर लग्जरी काराें से सवारियां ढोने के बहाने लोगों का अपहरण कर गिरोहाें को सौंपकर कमीशन लेते थे। अब नक्सली युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
क्या कहते है जिम्मेदार
एसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जिले में तो आतंकी या नक्सली लोगों का हाथ नजर नहीं आ रहा है। फिर भी वह बसाें व बीहड़ के रास्ताें की गहनता से चेकिंग करवाकर इन अवैध करोबारियाें पर शिकंजा कसकर सलाखाें के पीछे भेजेंगे।