सूदखोरों के 80 हजार रुपये कर्ज के चले दबे किसान ने बुधवार तड़के आग लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान की चीखों से परिवार वालों की नींद टूटी। परिजनों ने बताया कि सूदखोर उस पर कर्ज देने का दबाव बना रहे थे। खेत में बोई मटर की फसल भी अच्छी नहीं हुई थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
एट थाना क्षेत्र के ग्राम जमरोही कला निवासी किसान परमानंद पांचाल (36) पुत्र डरकोले पांचाल ने बुधवार तड़के करीब चार बजे खुद के ऊपर केरोसिन डालकर आग लगा ली। परमानंद की चीख पुकार सुनकर घरवाले जग गए और उन्होंने भी शोर मचाना शुरू कर दिया। पड़ोस भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों ने ग्रामीणों के सहयोग से किसी तरह आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कुछ देर में उन्होंने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक परमानंद ने दम तोड़ दिया था। यह देखकर घर में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उधर, परिजनों ने बताया कि परमानंद ने सूदखोरों से करीब 80 हजार रुपये कर्ज ले रखा था। सूदखोर उस पर रुपये चुकाने का निरंतर दबाव बना रहे थे। इस बार उसकी मटर की फसल भी अच्छी नहीं हुई थी, जिससे आजिज आकर उसने यह कदम उठा लिया।
थानाध्यक्ष चंद्रशेखर का कहना है कि फिलहाल यह नहीं पता चल सका है कि किसका कितना कर्ज था, और कौन उससे तगादा कर रहा था। इसकी जांच की जा रही है।
ग्रामीणों की मानें तो परमानंद की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर थी। उसके पास थोड़ी जमीन थी, जिस पर खेती पर वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। लेकिन ज्यादा मुनाफा न होने के चलते उसे आए दिन कर्ज लेना पड़ा था। साथ ही वह अकेला परिवार में काम करने वाला था।
परमानंद के दो बेटे हैं और दोनों का इलाज चल रहा है। इसके लिए उसे काफी कर्जा लेना पड़ा था। उसका बड़ा बेटा जन्म से ही दिव्यांग है, जिसका राजस्थान के उदयपुर में इलाज चल रहा है। वहीं दूसरा बेटा भी किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, जिसका इलाज इटावा के सैफई अस्पताल में चल रहा है। बेटों के इलाज में उसका काफी रुपया लग चुका है। इसके लिए उसने कर्ज लिया था।