कालपी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नगर कार्यवाह की बुधवार को हुई मौत के मामले में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। जिस कारण विसरा सुरक्षित रखा गया है। किसी तरह का माहौल खराब न हो इस कारण प्रशासन ने बुधवार की रात ही शव का पोस्टमार्टम भी करा दिया था। वहीं मामले में 31 मई को सात नामजद व पंद्रह अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में हत्या की धारा बढ़ा दी गई है। मामले को लेकर भाजपाइयों व हिंदूवादी संघटनों में जबरदस्त आक्रोश है। विहिप के लोगों ने तो सीओ संजय शर्मा का घेराव भी किया। कोतवाली पुलिस ने मामले में दो लोगों को पहले ही गिरफ्तार भी कर चुकी है। उधर गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजघाट में संघ नेता के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
बता दें कि 31 मई को नगर के मिर्जामंडी मोहल्ले में एक प्लाट के विवाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नगर कार्यवाह के घर में घुसकर एक दर्जन से अधिक लोंगो ने लाठी, डंडे व धारदार हथियारों से हमला किया था। मारपीट में संघ नेता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गंभीर हालत में उन्हें उरई जिला अस्पताल व वहां से फि र लखनऊ रेफ र कर दिया गया था। मंगलवार को लखनऊ से लौटते ही बुधवार को उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए सीएचसी लेकर गए जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनकी मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों की संख्या में भाजपाई व इलाकाई लोग अस्पताल पहुंच गए। नाराज परिजनों दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। गुरुवार को भी माहौल तनावपूर्ण रहा। मृतक संघ नेता रामऋषि मेहरोत्रा की पत्नी अंशु मेहरोत्रा ने पुलिस अधिकारियों के सामने चीख चीखकर हत्या की साजिश में शामिल कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी बताए हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि कोई भी हो, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कोतवाली में मौजूद एसपी और एएसपी ने भी जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का भरोसा दिलाकर भाजपाइयों को शांत कराया।
गिरफ्तारी के लिए दिया तीन दिन का अल्टीमेटम
मामले को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बेहद गंभीरता से लिया है। कन्नौज में चल रहे ओटीसी शिविर में भी यह मामला छाया रहा। संघ के प्रांत प्रचारक ने मामले की रिपोर्ट संघ के नेताओं से मांगी है। उधर विहिप व हिंदूवादी संगठनों के पुलिस को सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। कार्यकर्ताओ का कहना है कि तीन दिन में आरोपियों की गिरफ्तारी न हुई तो कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे।
चौकी इंचार्ज पर भी आरोप जड़े
घटनास्थल के अंतर्गत आने वाली इलाकाई चौकी टरननगंज के इंचार्ज की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी होने के बाद भी उन्होंने उदासीनता बरती। मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि उनके संज्ञान में मामला था पर वह गुंडों को संरक्षण देते रहे जिससे विभिन्न मोहल्ले के अराजकतत्वों ने लामबंद होकर घटना को अंजाम दिया।