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कहीं सीढ़ियां तो नहीं बनी चोरों की मददगार

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मुख्य दरवाजे की कटी कुंडी दिखाता पुजारी। - फोटो : ORAI
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उरई/सिरसाकलार। कोड़ा किर्राही गांव स्थित मंदिर में हुई मूर्तियों के चोरी के मामले में एक नई सामने आई कि चोर मंदिर के बाहरी हिस्से में बनी सीढ़ियों के सहारे पहले छत तक पहुंचे, फिर बाएं ओर बनी दीवार के सहारे वे नीचे पहुंचे, जहां से मंदिर के पीछा के दरवाजों का पल्ला ही औजार से खोलकर अलग किया। इसके बाद वे मंदिर में पूरी तरह से दाखिल हो सके, तब जाकर उन्होंने मूर्ति वाले कमरे की कुंडी को कटर से काटा। अभी तक माना जा रहा था कि चोर मुख्य दरवाजे से दाखिल हुए और पीछे के दरवाजे से भाग निकले। इन नई स्थितियों से साफ है कि मंदिर को अच्छी तरह से जानने वाला भी इस चोरी में शामिल हो सकता है। सोमवार की देर शाम तक एसओजी टीम मंदिर में जांच पड़ताल करती रही।
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शनिवार की देर रात चोरों ने प्राचीन मंदिर से भगवान की कीमती मूर्तियां चुराई थीं। इसके बाद से ही पुलिस महकमे में हड़कंप है। पुलिस गांव के संदिग्धों से लेकर जेल में बंद अपराधियों तक के बीच में चोरों को तलाश रही है। एसपी ने मामले के खुलासे के लिए एसओजी व सर्विलांस की टीमों को भी लगाया है। सोमवार की शाम एसओजी की जांच के दौरान सभी की नजर मंदिर की दीवार से लगी उन सीढ़ियों पर पड़ी, जो कि चोरों के लिए मददगार साबित हो सकती है। सीढ़ियां देखने के बाद चोरों के छत के रास्ते से ही घुसने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस सूत्रानुसार फोरेंसिक की टीम को एक बार दोबारा बुलाया जा सकता है, ताकि सीढ़ियों व छत पर हाथ व पैर के कुछ निशान जुटाए जा सके। वहीं ग्रामीण मंदिर परिसर में मूर्तियां न होने से काफी दुखी व परेशान हैं। पुलिस ने भी मंदिर की किसी वस्तु को हाथ न लगाने के लिए चेता रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिनों से मंदिर में पूजा अर्चना नहीं की गई है, जिससे उनका किसी काम में मन नहीं लग रहा है। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक डॉ एके सिंह का कहना है कि टीमें सक्रिय हैं, जल्द ही कोई न कोई सुराग जरूर हाथ लगेगा, जिससे पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
सिरसाकलार कस्बे से थोड़ी ही दूरी पर कानपुर देहात जनपद की भी सीमा है। लिहाजा पुलिस चोरों में से किसी के वहां के भी होने की आशंका से इंकार नहीं कर रही है। देहात पुलिस को भी चोरों की जानकारी के लिए सक्रिय किया गया है।
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गांव वाले मंगलवार को तीसरे दिन भी मूर्तियों की तलाश के लिए जंगलों की खाक छानते रहे। ग्रामीण कमलेश के मुताबिक उन्हें तो बस भगवान की मूर्तियों से मतलब है, प्रयास यही है कि कपड़ों की तरह ही मूर्तियां भी मिल जाए, इसके लिए वे कॉबिंग कर रहे हैं।
पुलिस व एसओजी की टीमों को मंदिर से कुछ दूरी पर एक अंग्रेजी ब्रांड की शराब के रैपर भी मिले हैं। पुलिस अब गांव के पियक्कड़ों से यह पता लगाने में जुटी है कि कौन कौन अंग्रेजी व किस किस ब्रांड की शराब पीते हैं, ताकि कोई सुराग हाथ लग सके।
वहीं पुलिस की सर्विलांस टीम भी खुलासे के लिए पूरी सक्रिय है। शनिवार की रात से लेकर रविवार की सुबह तक मंदिर के आसपास के टावर से पता किया जा रहा है कि कौन कौन नंबर चल रहे थे। जिससे कुछ संदिग्ध नंबर भी पुलिस के हाथ लगे हैं।
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