माधौगढ़/उरई। उरई से ग्वालियर जा रही प्राइवेट बस शनिवार की सुबह खंदक में पलट गई थी। हादसे में 10 यात्री घायल हो गए थे। जबकि, एक यात्री लापता हो गया था। रविवार की सुबह इस यात्री का शव खंदक में भरे पानी में उतराता मिला। स्थानीय लोगों की सूचना पुलिस पहुंची और शव को खंदक से बाहर निकलवाया। घटना सूचना पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। सीओ, एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया। तब करीब तीन घंटे बाद जाम खुल सका।
उरई से ग्वालियर जा रही प्राइवेट बस शनिवार की सुबह जालौन-बंगरा मार्ग पर कमसेरा के पास खंदक में पलट गई थी। इससे बस पर सवार दस लोग घायल हो गए थे। ग्रामीणों ने खिड़की के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला था। जबकि एक यात्री का पता नहीं चला था। मौके पर पहुंची रेढर थाना पुलिस ने भी खंदक में यात्री की तलाश नहीं कराई थी।
रविवार को खंदक में भरे पानी में एक व्यक्ति का शव उतराता नजर आया। पुलिस ने शव को खंदक से बाहर निकलवाया। बाद में मरने वाले की पहचान परधानी रेढर निवासी मोहनदास पाल (45) के रूप में हुई। इसके बाद मौके पर पहुंचे परिजनों पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कमसेरा के पास शव रखकर सड़क जाम कर दी। परिजनों का कहना था कि अगर पुलिस तत्काल खंदक में तलाश कराती तो मोहन की जान बच सकती थी। जाम व हंगामे की सूचना पर एसडीएम पुष्कर नाथ चौधरी व सीओ जालौन संतोष कुमार वहां पहुंचे और आक्रोशित लोगों को समझा कर जाम खुलवाया। इस दौरान तीन घंटे तक जालौन-बंगरा मार्ग पर आवागमन बाधित रहा। परिजनों ने बताया कि हादसे के वक्त मोहन अपनी ससुराल गड़ेरना जा रहा था। वह मजदूरी कर परिवार का पेट भरता था।
मोहन की पत्नी गुड्डी का कहना है कि उसके पिता प्रमोद के बुलाने पर पति ससुराल जा रहे थे। उसने भी साथ ले चलने के लिए कहा था, लेकिन पति ने होली पर वहां चलने की बात कही थी। मोहन ने रविवार को घर लौटने की बात कही थी। वह रविवार को पति के घर लौटने का इंतजार कर रही थी, पति तो नहीं आए, लेकिन उनकी मौत की खबर आ गई। गुड्डी ने कहा कि उसे क्या पता था कि शनिवार को पति से उसकी आखिरी मुलाकात होगी।
जालौन बंगरा मार्ग पर जाम लगाए परिजन व ग्रामीण- फोटो : ORAI
रोते बिलखते मृतक के परिजन- फोटो : ORAI
जाम में फंसे वाहन- फोटो : ORAI