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Jalaun News: दलालों पर कसा शिकंजा, लाइसेंस प्रक्रिया में फेल होने लगे लोग

Fri, 02 Aug 2024 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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जुलाई माह में 798 लाइसेंस के लिए किए गए आवेदनों में 189 हुए फेल
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-फाइल में कमियां निकालने व परीक्षा में फेल होने की फेहरिस्त हुई लंबी
फोटो-35-एआरटीओ कार्यालय में निरीक्षण करते डीएम व एसपी।
उरई। शासन की जीरो टोलरेंस की नीति अब जिले में भी काम आने लगी है। दो दिन पूर्व डीएम और एसपी की छापेमारी के बाद दलालों की गिरफ्त से एआरटीओ कार्यालय के मुक्त होने से अब लोग लाइसेंस की प्रक्रिया में फेल हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि पहले तो दलाल सीधे कार्यालय में जाते थे और लाइसेंस बनकर आ जाता था। लेकिन अब कार्यालय में झल्लाए बाबू फाइलों में कमियां निकाल रहे है। जुलाई माह में आए आवेदनों में करीब 189 आवेदन निरस्त किए गए हैं।
एआरटीओ कार्यालय में लगातार हो रही छापेमारी से अब कार्यालय को दलालों से मुक्ति मिल गई है। जिससे अब लोगों के आवेदन निरस्त भी किए जाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि पहले वह खुद ही कार्यालय के बाहर बनी दुकानों में जाते थे और दलाल शुरू से लेकर लाइसेंस देने तक का पूरा ठेका ले लेते थे। इसके बाद घर बैठे ही लाइसेंस मिल जाता था। लोगों को किसी भी कागजी कार्रवाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ता था। क्योंकि दलाल को पूरा ठेका देने के बाद व्यक्ति आसानी से घर बैठ जाता था और उसका लाइसेंस घर पहुंच जाता था।
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तब बिना दलाल के कोई भी कार्य कराना आसान नहीं था। लेकिन लगातार कार्यालय में हो रही छापेमारी से अब दलालों का आना-जाना बंद हो गया है। जिससे लोग खुद ही कार्यालय जाते हैं और अपना काम करवाते हैं। पूरी प्रकिया से लोगों को जरूर गुजरना पड़ता है। लेकिन उनके अतिरिक्त रुपये खर्च नहीं हो रहे हैं। लेकिन अब कार्यालय में लोगों को फेल करने का नया तरीका शुरू हो गया है।
लाइसेंस के लिए आने वाले व्यक्ति को अब आवेदन करने के बाद गाड़ी भी चलानी पड़ती है और अन्य कागजी कार्रवाई भी करनी पड़ती है। जुलाई माह में आए 798 आवेदनों में 609 लाइसेंस जारी किए गए हैं। जबकि 189 को निरस्त किया गया है। लोगों का कहना है कि समय जरूर लग रहा है, लेकिन अब कम रुपयों में लाइसेंस बन जाता है।
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वर्जन-
आवेदक ऑनलाइन आवेदन करते हैं। कई बार गैरहाजिर होने की वजह से भी लाइसेंस जारी नही हो पाता। लाइसेंस देने से पहले परीक्षा ली जाती है। इसमें कई बार अभ्यर्थी फेल हो जाते है। जिसकी वजह से उनकी पुन: परीक्षा करवाई जाती है। -सुरेश कुमार वर्मा. एआरटीओ प्रशासन
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