उरइ विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला दीवानी न्यायालय परिसर में किया गया। इसके अलावा तहसीलों में स्थित दीवानी न्यायालयों में भी लोक अदालत लगी। लोक अदालत में 39532 वादों का निस्तारण किया गया। बैंकों के बकाया ऋण के 1019 मामलों में बैंक एवं बकाएदारों के बीच समझौता कराते हुए 3.36 करोड़ रुपये की धनराशि जमा कराई गई। लोक अदालत में करीब 42 हजार वादकारी लाभान्वित हुए। आपराधिक प्रकरणों में विभिन्न मजिस्ट्रेट न्यायालयों ने 3.48 लाख रुपये बतौर जुर्माना धनराशि अभियुक्तों से राजकीय कोष में जमा कराई। जिला जज ने 39 मामले निस्तारित किए। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी राजीव कुमार ने 93 मामलों में पीड़ित याचियों को क्षतिपूर्ति दिलाई। इससे पहले जिला जज तरुण सक्सेना ने शुभारंभ किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रेनू यादव ने बताया कि कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश अमित पाल सिंह एवं अमृता शुक्ला ने 111 मुकदमों का निस्तारण किया। एडीजे प्रथम सुरेश चंद्र, विशेष न्यायाधीश अचंल लवानिया, शिवकुमार, प्रकाश तिवारी, विजय बहादुर यादव, प्रशांत कुमार ने 409 मुकदमे निस्तारित किए। सीजेएम अंजू राजपूत ने 956 दांडिक वादों का निस्तारण कर 1.88 लाख अर्थदंड जमा कराया। सिविल जज महेंद्र कुमार रावत ने 34 वादों का निस्तारण किया। वाह्य न्यायालय कोंच के न्यायिक अधिकारी पलाश गांगुली, जालौन के न्यायिक अधिकारी अर्नवराज चक्रवर्ती, नेहा राजन, कालपी की न्यायिक अधिकारी रागिनी मिश्रा एवं सुभाष, न्यायाधिकारी माधौगढ़ श्वेता यादव ने वादों का निस्तारण किया। इसके अलावा अपर जिला मजिस्ट्रेट एवं सभी उप जिला मजिस्ट्रेट, नगर मजिस्ट्रेट व तहसीलदार न्यायालयों द्वारा राजस्व संहिता और फौजदारी के 620 मामले निस्तारित किए।