उरई। जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट और कोर्ट फीस स्टांप की लगातार बनी कमी अब गंभीर संकट का रूप लेती जा रही है। इसके चलते अधिवक्ताओं को दैनिक न्यायिक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई लोगों को अधिक कीमत देकर ब्लैक में टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि तीन महीनों से कोषागार से अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट और कोर्ट फीस स्टांप की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। कई बार मांग भेजे जाने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में टिकट उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे न्यायालय परिसर में टिकटों की बिक्री लगभग ठप हो गई है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि जरूरतमंदों को अधिक कीमत पर टिकट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्यायालय में आने वाले वादकारियों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई मामलों में आवश्यक दस्तावेज समय पर दाखिल न हो पाने से न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
सहायक कोषागार अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट और कोर्ट फीस टिकट की मांग शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि मार्च माह में ही कोषागार में कोर्ट फीस टिकट का स्टॉक समाप्त हो गया था। मांग पूरी न होने के कारण समस्या लगातार बनी हुई है।
यह होता है अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट
अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट वकालतनामे और कुछ अन्य न्यायिक दस्तावेजों पर लगाए जाते हैं। इनसे प्राप्त राशि अधिवक्ता कल्याण निधि में जमा होती है, जिसका उपयोग अधिवक्ताओं के कल्याण और सहायता संबंधी योजनाओं में किया जाता है। टिकटों की अनुपलब्धता से न केवल न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि कल्याण निधि की आय पर भी असर पड़ रहा है।