मुहम्मदाबाद। भले ही अनलाक हुए डेढ़ महीने का समय हो गया हो पर फूलों के कारोबार में तेजी अभी तक नहीं दिखाई दी है। यू कहें कि कोरोना का असर फूलों के कारोबार पर भी पड़ा है तो गलत न होगा। पहले लॉकडाउन के चलते शादी बरातों पर पाबंदी और धार्मिक स्थलों पर पड़े तालों ने व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित किया, अब धार्मिक स्थल खुल भी गए हैं तब भी फूलों की बिक्री है कि बढ़ने का नाम नहीं ले रही है।
ऐसे में फूलों की खेती करने वाले किसान और उन्हें खरीद कर बेचने वाले व्यापारी दोनों ही परेशान हैं। कहना है कि फूलों का व्यापार अब घाटे का सौदा लगने लगा है, महंगी खेती के बाद भी हाथ कुछ नहीं लग रहा है। सावन का महीना चल रहा है, ऐसे में फूलों की किल्लत हुआ करती थी और जबकि इस बार भरमार है क्योंकि मंदिरों में भीड़ काफी कम हो रही है। बता दें डकोर ब्लाक के कुठौंदा, खरका, मुहम्मदाबाद आदि गांवों में पिछले काफी समय फूलों की खेती होती है। यहां के गुलाब, गेंदा और नौरंगी आदि फूल न सिर्फ जनपद बल्कि झांसी, औरैया, इटावा आदि शहरों तक भेजे जाते हैं। लॉकडाउन के बाद से ही इन फूलों के कारोबार पर काफी असर पड़ा है।
घटाना पड़ा खेती का क्षेत्रफल
खरका के किसान मानसिंह का कहना है कि फूलों की मांग कम होते देख उन्हें मजबूरन खेती का दायरा भी कम करना पड़ा। पहले करीब 6 से 8 बीघा में गुलाब और गेंदा की खेती करते थे, जो कि अब 2 से 3 बीघा तक पहुंच गई है, जिसमें सिर्फ गुलाब ही पैदा किया जा रहा है।
आधे दामों पर बेचने पड़ रहे फूल
कुठौंदा के किसान जीतू के मुताबिक गेंदा और नौरंगी फूलों की मांग इस कदर कम हुई है कि उन्हें फेंकना तक पड़ रहा है, वहीं गुलाब जो कि पहले 80 से 100 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब 40 से 50 रुपये में बेचना भी मु्िश्कल हो रहा है। फूलों की खेती में इतना नुकसान पहले कभी नहीं देखने को मिला।
शृंगार न सजावट, फीका कारोबार
गांधी नगर, उरई निवासी सुरेश माली ने बताया कि लॉकडाउन से पहले करीब पांच से छह क्विंटल फूल आसपास के जनपदों में भेजते थे, इस वक्त यह संख्या मात्र 50 से 60 किलो के आसपास ही बची है। सावन में भी इस बार कहीं न तो शृंगार हो रहा है और न ही किसी समारोह में सजावट को ही महत्व दिया जा रहा है। जिससे व्यापार मंदा पड़ा है।
मंदिरों, मजारों में भी भीड़ नहीं
डकोर ब्लाक के कारोबारी चंदन ने बताया कि अनलाक होने पर सोचा था कि कारोबार बढ़ेगा पर मंदिरों और मजारों में भीड़ ही नहीं हो रही तो किया भी क्या जा सकता है। होटल और गेस्ट हाउसों में भी सन्नाटा पड़ा हुआ है। यही हाल रहा तो नवंबर दिसंबर में भी कारोबार के ठीक होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
सुरेश माली- फोटो : ORAI
जीतू राजपूत- फोटो : ORAI
मानसिंह- फोटो : ORAI
डकोर ब्लाक के खरका गांव में फूलों के खेत।- फोटो : ORAI
गोदाम में फूलों का ढेर दिखाता कारोबारी।- फोटो : ORAI