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Jalaun News: रबी के सीजन में उर्वरक की कमी नहीं होने का दावा

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उरई। कई सालों से डीएपी व यूरिया की किल्लत से किसान जूझ रहे हैं। समय पर किसान फसल तो बो रहे हैं लेकिन खाद न मिल पाने के कारण उन्हें कई दिनों तक परेशान होना पड़ता है।
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किसानों को रबी के सीजन में परेशान न होना पड़े इसके लिए पहले से ही कृषि विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खाद की खरीद लक्ष्य के अनुसार होने लगी है।
खरीफ की अपेक्षा रबी के सीजन में उर्वरक का अधिक इस्तेमाल होता है। खासतौर पर गेंंहू, मटर की फसल में। दरअसल, गेहूं की फसल की सिंचाई चार से पांच बार होती है। इसमें उर्वरक का इस्तेेमाल किया जाता है। इसके अलावा चना, मटर, सरसों आदि फसलों के लिए भी उर्वरक की डिमांड रहती है। जिले में मटर रबी के सीजन में अधिक किया जाता है।
जिसके लिए एक जनपद एक उत्पाद में मटर को लिया गया है। हर वर्ष मटर पर किसान विशेष ध्यान देते हैं। फसलों की बुआई व टॉप ड्रेसिंग के समय समितियों में यूरिया और डीएपी के लिए लंबी कतारें लगती हैं। मांग ज्यादा होने पर कमी पड़ जाती है। जिसके चलते समितियों एवं दुकानों पर मारामारी रहती है।
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इस बार इस तरह का माहौल न हो इसके लिए पहले से ही कृषि विभाग ने लक्ष्य का पीछा करना शुरू कर दिया है। रबी की फसल में डीएपी व यूरिया का लक्ष्य 46,181 मीट्रिक टन रखा गया है। जिसमें अभी तक 16,776 मीट्रिक टन खरीद की जा चुकी है। जबकि 331 मीट्रिक टन वितरित भी हो चुकी है। प्रतिदिन लक्ष्य बढ़ रहा है।

आटा निवासी किसान सुनील तिवारी ने बताया कि कई सालों से खाद की किल्लत रही है। फसल बोने के बाद जब डिमांड बढ़ती है, तब परेशानी भी बढ़ने लगती है। रबी की फसल में ज्यादा खाद लगती है।
कोंच के ग्राम खनुआ निवासी किसान महेंद्र कुमार ने बताया कि अब सहूलितय हो गई है। जो एक बार में 20-20 बोरी खाद मिल रही है। पिछले साल बहुत परेशान होना पड़ा था। इस बार किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई।
सभी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। रबी की फसल को लेकर किसानों को कोई परेशानी न हो इसके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई है। -गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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