मकर संक्रांति पर मौसम के बदले तेवर अभी कायम हैं। रविवार को सुबह के समय
घना कोहरा छाया रहा। सर्द हवाओं से लोग ठिठुरते रहे। दोपहर के समय हल्की
धूप निकली जरूर, लेकिन तापमान में कम ही रहा। शनिवार की अपेक्षा रविवार को
अधिकतम तापमान में अधिक गिरावट दर्ज की गई। इस मौसम ने किसानों की उम्मीद
जरूर बढ़ा दी है। वे मान रहे हैं कि
कुछ दिन ऐसा ही मौसम रहे तो गेहूं की
पैदावार में कुछ बढ़ोत्तरी हो सकती है। जनवरी माह में मकर संक्रांति के
बाद मौसम मे आया बदलाव रविवार को भी जारी रहा। सुबह से ही तेज सर्द हवाओं व
घने कोहरे ने जनजीवन थाम दिया। कोहरे की सफेद चादर के कारण सड़कों पर वाहन
रेंगते नजर आए। वहीं रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित रहा। अधिकांश
ट्रेनें अपने
निर्धारित समय से तीन से पांच घंटे तक लेट रहीं। सबसे ज्यादा
प्रभावित पैसेंजर ट्रेने रहीं। ठिठुरन भरी सर्दी से निजात के लिए नगर
पालिका प्रशासन ने शहर में कई स्थानों पर अलाव जलवाए। इसके अलावा जिला
प्रशासन ने भी अलाव के इंतजाम किए। पर सर्दी से गरीबों को बचाने के लिए
प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम अभी तक नहीं किए जा सके हैं। इसकी वजह से
गरीब व
बेसहारा लोग खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। इस वर्ष
इन बेसहाराओं के लिए शहर में एक भी रैन बसेरा नहीं बनवाया गया है। शनिवार
को अधिकतम तापमान 20.5 दर्ज किया गया। इसमें तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट
आई। रविवार को अधिकतम तापमान 17 डिग्री रहा। जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर
7.5 डिग्री पर आ गया। बताते चलें कि बदले मौसम ने
भले ही आम जनजीवन पर
असर डाला है लेकिन इसे रबी की फसल के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।
किसान विज्ञानियों की मानें तो इस तरह का मौसम दस पंद्रह दिन बना रहे तो
गेहूं की पैदावार को संजीवनी मिल जाएगी। सूखे से परेशान किसानों कुछ राहत
मिल सकती है।