रजबाहा की जांच करते प्रदेश की टीम के अधिकारी।
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उरई (जालौन)। प्रदेश सरकार की ओर से बुंदेलखंड पैकेज के कार्यों का विशेष टीम ने शुक्रवार को तीसरे दिन भी स्थलीय निरीक्षण किया। टीम को पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, जल निगम, नहर विभाग सभी के कार्यों में कुछ न कुछ खामी नजर आई है। जांच टीम जैसे ही आगे बढ़ रही है वैसे ही परत दर परत बुंदेलखंड पैकेज के कार्यों की कलई खुलती जा रही है। अधिकारी भी जांच टीम को लेकर असहज नजर आ रहे है। स्थलीय निरीक्षण और ग्रामीणों से बातचीत करना कई विभागों के अधिकारियों को नागवार गुजर रहा है।
शुक्रवार को सबसे पहले जांच दल नियोजन विभाग के वरिष्ठ शोध अधिकारी डा. नागेंद्र यादव के नेतृत्व में निकला। भूमि संरक्षण व वन विभाग के कार्यों का निरीक्षण किया। सैदनगर नाला पर 31 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की सुविधा के लिए 13.37 लाख की लागत से चेकडैम बनाया गया। चेकडैम के स्थलीय निरीक्षण के दौरान टीम को खामियां नजर आई। कई जगह दरारें देखी गई जिसे टीम ने अपनी रिपोर्ट में शामिल कर लिया। इसके बाद अमरोड़ा नाला पर 13.48 लाख की लागत से बना चेकडैम चेक किया। यहां पर दो खामियां नजर आई एक तो स्लैब की डिजाइन ठीक नहीं थी तो दूसरी ओर एक जगह क्रेक मिला। बताया गया कि इस चेकडैम से 30 हेक्टेयर असिंचित जमीन को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। सिकरी पहुंची टीम ने नाले पर बने चेकडैम को चेक किया। यहां पर खामियां ही नजर आई। कई जगह चटकन देखने को मिली।
इसके बाद टीम धमसेनी गांव पहुंची यहां पर जल निगम की ओर से स्थापित किए गए हैंडपंप को चेक किया। यहां पर भी टीम को खामी ही नजर आई। कारसदेव बाबा के चबूतरे के सामने लगा हैंडपंप खराब मिला। गांव के जितेंद्र कुमार ने बताया कि चार दिन से हैंडपंप पानी नहीं दे रहा है। ममता देवी ने बताया कि गांव के प्रधान ने एक छड़ निकाल ली इससे पानी आना बंद हो गया। यहां पर नाली व सोकपिड ध्वस्त मिला। शिवदीन के मकान के सामने लगा हैंडपंप तो चालू हालत में मिला लेकिन नाली व सोकपिड यहां पर जमींदोज मिला। हैंडपंप के पांच-छह घर के लोगों को ही पानी मिल रहा है। जियालाल के घर के सामने लगे हैंडपंप के पास तो सोकपिड़ मिला ही नहीं। इसके बाद टीम ने नहर विभाग की ओर एट रजबाहा में कराए गए 2.5 किमी लाइनिंग के कार्य को देखा। इस कार्य में बुंदेलखंड पैकेज का 268.00 लाख रुपये खर्च किया गया। यहां पर भी कंकरीट पत्थर के अलावा बड़ी मात्रा में मिट्टी मिली। इसके अलावा मौके पर मौजूद जेई से मानक के बारे में रिपोर्ट ली। पक्का कार्य तो हो गया लेकिन विभाग ने अभी तक इसमें इस्तेमाल सामग्री और मानक के मुताबिक कार्य की कोई जांच नहीं कराई जिसकी वजह से रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सके। परेछा गांव पहुंची टीम को पशुपालन विभाग का काम भी अच्छा नहीं मिला। पैकेज से खरीदी गई बकरियों में घालमेल की संभावना पर उस समय मोहर लग गई जब लाली देवी ने कहा कि उसे तो चार बकरियां और एक बकरा ही मिला। जबकि प्रावधान एक यूनिट में पांच बकरी व एक बकरा देने का है।
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अरे यह क्या कह गए साहब
जल निगम की ओर से बुंदेलखंड पैकेज से वर्ष 2010-11 व 2011-12 में कुल 300 हैंडपंप स्थापित किए गए। हैंडपंप कई जगह कागजों में ही लगा दिए गए। इस बात की जानकारी टीम को भी हो गई। तभी धमसेनी गांव में निरीक्षण के दौरान जांच दल के एक सदस्य के मुंह से निकल गया यहां डुप्लीकेशी बहुत है। पीछे चल रहे एक जेई के मुंह से निकल पड़ा अरे यह साहब क्या कह गए। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने सफाई भी प्रस्तुत की। धमसेनी में तीन हैंडपंप चेक किए गए।
गांव में पैदल ही घूमे
कोंच ब्लाक के धमसेनी गांव में हैंडपंप को चेक करने के लिए पहुंचे विशेष दल गांव की गलियों में पैदल ही घूमा। ग्रामीणों से बातचीत भी की। गांव के सुशील तिवारी, जितेंद्र कुमार, अंकित कुमार, ने कहा कि गांव में पानी की परेशानी हो रही है। हैंडपंप खराब हो जाए तो आसानी से सुधरता नहीं है। एक हैंडपंप पांच माह खराब रहा तब जाकर सुधरा।