फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jalaun News: नहर विभाग का खेल, सिल्ट सफाई के नाम पर 34 लाख किए साफ

Fri, 24 May 2024 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
विज्ञापन
विज्ञापन
उरई। बेतवा नदी की ब्रांच मंगला नाला, जिसे किसान अपने लिए अमृत की नदी कहते हैं। किसानों की फसलों के लिए इसका पानी वरदान से कम नहीं है। मलंगा नाला के पानी की सींच से हजारों किसानों को लाभ मिलता है। लेकिन बेतवा नहर विभाग के प्रखंड द्वितीय के अधिकारियों ने सफाई के नाम पर पानी की लूट का अंजाम दे दिया। नहर विभाग ने सफाई के नाम पर 34 लाख का बजट कागजों पर ही खर्च करके मलंगा नाला साफ कर डाला जबकि हकीकत में किसानों के लिए जीवनदायिनी बने मलंगा नाले में सालों से कोई भी काम कराया ही नहीं गया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई घोटाले की शिकायत पर संवाद न्यूज एजेंसी ने इस पूरे मामले की तहकीकात कराई ।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई शिकायत की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची।ग्रामीणों ने बातचीत में बताया कि इस साल मलंगा ब्रांच नाले में कोई काम हुआ।अगर नहर विभाग ने सफाई कर दी होती तो सिंचाई के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पडंता।सिल्ट की सफाई न होने से पानी आगे नहीं बढ पा रहा है। पानी एक स्थान पर जमा रहने से बदबू भी फैल रही है।
नहर विभाग ने सिल्ट सफाई के नाम पर अपने चहेते ठेकेदारों को 34 लाख के तीन टेंडर करके बजट भी दे दिया है। नहर विभाग ने कोंच से कुठौंद की तरफ निकले मलंगा नाले की सफाई के लिए फरवरी और मार्च माह में टेंडर प्रकि्रया की और अपने चहेते ठेकेदारों को काम दे दिया। तुरंत एक से दो महीने में काम पूरा दिखाकर वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में भुगतान भी हो गया। पढ़े खास रिपोर्ट
विज्ञापन

सीन-1-उरई के 21 किमी चलने पर जालौन से बंगरा के लिए दो किमी चलने के बाद रास्ते में बेतवा के ब्रांच नाले पर बना पुल मिला। पुल के नीचे मलंगा नाला दिखा। जिसको नहर विभाग के कागजों में 54 से 56 किमी कहते हैं। इस जगह पर करीब दो किलो मीटर दूरी की सफाई करने के लिए विभाग ने जीएसटी के साथ दस लाख रुपये खर्च किए। लेकिन मौके पर नाले की कोई सफाई नहीं दिखी। आसपास झाड़ी लगी हुई थी।जिससे यह साफ पता चल रहा था कि बीते तीन से चार माह में कोई भी का नहीं कराया गया है।पानी में पौधे लगे हुए थे।नहर विभाग के इस सफाई टेंडर के तहत किनारों पर मिट्टी के भराव के साथ मलंगा नाले की सफाई भी होनी थी। स्थानीय निवासी मुहम्मद इशाक अहमद, राजू, बिट्टी ने बताया कि इस साल आसपास नाले में कोई सफाई नहीं हुई।न कोई आया है।
सीन-2-इसके बाद टीम जालौन से प्रतापपुरा गांव के लिए करीब तीन किमी चली। गांव के बाहर निकलते ही मलंगा नाला मिला। जिसको विभाग 49 से 51 किमी कहता है। विभाग ने इस नाले में सफाई के नाम पर कागजों पर करीब 11.55 लाख रुपये खर्च किए।पड़ताल में कहीं भी कोई काम चार से पांच महीने के अंदर का नहीं मिला। गंदगी से नाला पटा पड़ा था। रपटा भी कई जगह से टूटा था। दीपेंद्र राव, राजू, बहादुर ने बताया कि दो साल से इसकी कोई सफाई नहीं हुई। कई बार शिकायत तक कर चुके हैं। गंदे पानी से बदबू आती है।
सीन-3-टीम औरैया रोड के लिए चली। बीच में जगनेवा लोहिया पुल मिला। इसके नीचे से मंलगा नाला निकला हुआ है। इसको विभाग के कागजों में 44 से 46 किमी कहते हैं। सिल्ट सफाई के लिए करीब 13 लाख रुपये खर्च हुए। पप्पू सूरज के साथ एक मंदिर के पुजारी बाबूराम ने बताया कि एक साल में उनके सामने कोई काम नहीं हुआ। जबकि नाले के पास बने मंदिर में ही वह रहते हैं। विभाग काम का झूठा दावा कर रहा है।


वर्जन-

मलंगा नाले में टेंडर प्रक्रिया के तहत काम कराया गया था। शिकायत का मामला संज्ञान में आया है। इस मामले को दिखवा रहा हूं। -सीपी सिंह, अधिशासी अभियंता द्वितीय प्रखंड, नहर विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें