मुहम्मदाबाद (जालौन)। नहर ओवरफ्लो होने से पुल नंबर 36 के पास नहर फट गई। इससे करीब सौ बीघा गेहूं व कटी पड़ी मटर की फसल जलमग्न हो गई। किसानों को जानकारी हुई तो खलबली मच गई। रात में ही वह परिवार के साथ खेतों पर पहुंच गए और फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने लगे। लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वह फसल को नहीं बचा पाए। किसानों ने अधिकारियों को सूचना दी। लेकिन कोई नहीं पहुंचा। करीब पांच घंटे बाद पहुंचे अधिकारियों ने स्थिति को देखा और फटी नहर को सही करवाने का आश्वासन दिया है।
डकोर ब्लाक के कुसमिलिया गांव के मौजे से नहर निकली है। जिसकी पटरी कई वर्षो से कटी पड़ी है। सफाई के नाम पर खाना पूरी की गई है। सोमवार रात पुल नंबर 36 के पास अचानक नहर की पटरी फट गई। इससे नहर का पानी तेजी से खेतों में भर गया। बहाव इतना तेज था कि एक घंटे में ही करीब पचास बीधा गेहूं व मटर की फसल पानी में डूब गई।
किसानों को जब इसकी जानकारी हुई तो वह खेतों की तरफ पहुंचे, लेकिन पानी का बहाव अधिक होने की वजह से वह पानी को नहीं रोक पाए और सुबह तक करीब सौ बीघा फसल में पानी ही पानी दिखने लगा। नजारा ऐसा था कि नहर व खेत समान दिखाई दे रहे थे। परिवार सहित खेतों पर पहुंचे किसानों ने कटी पड़ी मटर की फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया। लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके।
किसानों ने अधिशासी अभियंता धर्मघोष को फोन लगाकर कहा कि आप एसी में बैठे रहो और हमारी साल भर की कमाई बर्बाद हो रही है। फोन के बाद भी कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा। करीब पांच घंटे बाद जेई आशीष कुमार, सींचपाल विनोद कुमार मौके पर पहुंचे और किसानों से कहा कि जल्द ही नहर को बंद करवा दिया जाएगा। लेकिन किसानों ने जब कर्मचारियों को बुलाने की बात कही तो सभी के बीच कहासुनी हो गई। किसी तरह मामला शांत हुआ।
किसान जय सिंह ने बताया कि उसकी पांच कटी मटर, हरिश्चंद्र दस बीघा गेहूं, मंगल सिंह पांच बीघा, तुलसीराम पांच बीघा, जितेंद्र चार बीघा, संदीप कुमार चार बीघा, सुभाष चार बीघा, अखिलेश दस बीघा सहित बीस किसानों की सौ बीघा मटर व गेहूं की फसल जलमग्न हुई है। सुबह जेई ने जेसीबी मंगवाकर पुल नंबर 38 के पास सफाई करवाई। इससे थोड़ा पानी खेतों से कम होना शुरू हुआ था।
फोटो - 17 जय सिंह।
पानी में साल भर के बह गए अरमान
कुसमिलिया गांव निवासी किसान जय सिंह ने बताया कि नहर से एक खेत अंदर होने के बाद भी उनकी पांच बीघा खेत में कटी पड़ी मटर पानी में खराब हो गई। रात भर वह अपने परिवार के साथ खेत की मिट्टी खोदकर मेड़ बनाते रहे, लेकिन इसके बाद भी वह फसल को नहीं बचा पाए। उनके साल भर के अरमान पानी में बह गए।
फोटो - 18 वीरेंद्र राजपूत
डीएम से लेकर सीएम तक पहले कर चुके हैं, शिकायत
किसान वीरेंद्र राजपूत ने बताया कि नहर की हालत पहले से ही खराब है। कागजों पर हर साल नहर की खुदाई हो जाती है। अगर मौके पर अधिकारी जाकर देंखे तो हकीकत सामने आए। उन्होंने इसके लिए डीएम से लेकर सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आज भी अधिकारियों को फोन लगाया। लेकिन इतना नुकसान होने के बाद भई कोई नहीं आया।
वर्जन
नहर को सही कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही उसे सही करवाया जाएगा। ओवरफ्लो होने से फसलों में पानी भर गया था। मशीन से कटी नहर को सही करवाया जा रहा है।
जेई आशीष कुमार नहर विभाग